AI Summit: गूगल डीपमाइंड के सीईओ हसाबिस बोले- विज्ञान-चिकित्सा में आएगी क्रांति, 5-8 साल में एजीआई बनेगा हकीकत

गूगल डीपमाइंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डेमिस हसाबिस ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विज्ञान और चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। हालांकि, इसके सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और संवाद जरूरी है। हसाबिस ने एआई सम्मेलन में कहा, दुनिया निर्णायक मोड़ पर है और आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) अगले पांच से आठ वर्षों में वास्तविकता बन सकती है। उन्होंने कहा, एआई आधारित कई कंपनियां, टूल्स और उत्पाद विकसित हो रहे हैं, जो चिकित्सा, दवाओं की खोज, मैटेरियल साइंस और जलवायु संबंधी तकनीक में नई संभावनाएं खोलेंगे। सामाजिक चुनौतियों में सतर्क रहने की नसीहत हसाबिस ने 'अल्फाफोल्ड' जैसे सिस्टम्स का जिक्र करते हुए कहा कि एआई का प्रभाव वैश्विक होगा। इस मामले में सतर्क आशावाद जरूरी है- तकनीकी जोखिम समय के साथ सुलझ सकते हैं, लेकिन एआई से जुड़ी सामाजिक चुनौतियां जटिल हैं और उनसे निपटने के लिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन से शुरू होकर पेरिस, सियोल और अब भारत तक हो रहे वैश्विक सम्मेलन वैश्विक नेताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर एआई के फायदे व्यापक रूप से साझा करने और जोखिम कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। एआई बनाम एजीआई मौजूदा एआई तकनीक आज कुछ खास कामों - जैसे अनुवाद, चैटबॉट या फोटो पहचान - में विशेषज्ञ होती है। जबकि, एजीआई ऐसी उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता होगी, जो इन्सानों जैसी समझ के साथ सीखने, तर्क-वितर्क, समस्या सुलझाने और विविध क्षेत्रों के काम करने में सक्षम होगी। इसका अर्थ है कि एजीआई को भविष्य में हम डॉक्टर, शिक्षक या इंजीनियर जैसी भूमिकाओं में भी देख सकते हैं। हम ऐसे मोड़ पर हैं, जहां 5-8 वर्षों में आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस का उदय होने वाला है। यह सम्मेलन अहम समय पर हो रहा है, क्योंकि हम अधिक स्वायत्त एआई प्रणालियां देख रहे हैं। संभावनाएं असीम हैं। - डेमिस हसाबिस मौजूदा एआई की सीमाएं अभी आसमां और भी हैं हसाबिस ने मौजूदा एआई के सीमित दायरे को रेखांकित किया। कहा, जटिल ओलंपियाड स्तर की समस्याओं को हल करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद, यदि प्रश्न अलग तरीके से पूछे जाएं, तो वही एआई प्रणालियां प्राथमिक गणित में भी गलतियां कर सकती हैं। उन्होंने कहा, जब मैं वर्तमान प्रणालियों को देखता हूँ और उनमें एक तरह की सामान्य बुद्धिमत्ता की कमी को देखता हूं, तो मैं निरंतर सीखने के लिए कहूंगा, यानी प्रशिक्षण के बाद और दुनिया में आने के बाद सीखना। ये भी पढ़ें:एआई समिट में तकनीक संग सजी भारतीय संस्कृति, भारत मंडपम में दुनिया ने देखा अद्भुत संगम हसाबिस ने वर्तमान एआई प्रणाली में कई महत्वपूर्ण कमियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, वर्तमान मॉडल प्रशिक्षण के बाद 'स्थिर' हो जाते हैं और वे नए अनुभवों से ऑनलाइन अनुकूलन नहीं कर सकते। एआई अल्पकालिक कार्यों को संभाल सकता है, लेकिन वर्षों तक चलने वाली सुसंगत रणनीतियों के साथ संघर्ष करता है। साथ ही, ये प्रणालियां कुछ क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं लेकिन अन्य क्षेत्रों में विफल हो जाती हैं, यहां तक कि एक ही डोमेन के भीतर भी ऐसा होता है। हसाबिस ने कहा, अगला लक्ष्य ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित करना है, जो निरंतर सीख सके, दीर्घकालिक योजना बना सके और कार्यों में निरंतरता बनाए रख सके। इन क्षमताओं के बिना, ओलंपियाड स्तर पर समस्या-समाधान करना वास्तविक बुद्धिमत्ता का प्रमाण होने के बजाय सीमित उपलब्धि ही रह जाती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 19, 2026, 04:44 IST
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