उत्तराखंड: 13 साल में बदल दिए 17 निदेशक, 18वें का नियम विरुद्ध तबादला निरस्त, एक साल भी नहीं टिक पा रहा कोई

विभागों में हर साल करोड़ों के लेन-देन का हिसाब-किताब रखने वाले प्रदेश के ऑडिट निदेशालय में कोई निदेशक एक साल टिक ही नहीं पा रहा। आलम ये है कि 13 साल में सरकार ने यहां 17 निदेशक बदल दिए। अब 18वां बदला गया था, जो आदेश नियमविरुद्ध होने के चलते सोमवार को रद्द कर दिया गया। राज्य स्थापना के बाद ऑडिट एक अनुभाग था, जो कि कोषागार एवं वित्त सेवाएं के अधीन था। दिसंबर 2012 में ऑडिट एक्ट पारित होने के बाद प्रदेश में स्वतंत्र ऑडिट निदेशालय बन गया। पहली तैनाती आईएएस सौजन्या को दी गई थी, जिनका कार्यकाल 18 दिसंबर 2012 से एक दिसंबर 2013 तक ही रहा। इसके बाद से सिलसिलेवार निदेशक बनते रहे और समय-समय पर हटाए जाते रहे। दिसंबर 2025 तक 17 निदेशक बदले गए।दो दिन पहले शासन ने ऑडिट निदेशालय में वित्त सेवा के अधिकारी अपर सचिव मनमोहन मैनाली को 18वें निदेशक के तौर पर ट्रांसफर किया लेकिन यह एक्ट उल्लंघन था। 30 नवंबर 2018 को विभागीय ढांचे में निदेशक का पद आईएएस संवर्ग का किया गया था जबकि मैनाली वित्त सेवा के थे। लिहाजा, सोमवार को शासन ने यह तबादला आदेश रद्द कर दिया। फिलहाल यहां 17वें निदेशक के तौर पर आईएएस दिलीप जावलकर तैनात हैं। उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के संस्थापक रमेश चंद्र पांडे का आरोप है कि बार-बार निदेशक बदलने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में करोड़ों रुपये की विशेष ऑडिट रिपोर्ट फाइलों में लटकी हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 20, 2026, 07:59 IST
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