Ayodhya: प्राण प्रतिष्ठा की स्मारिका का अनुपूरक अंक प्रकाशित, पीढ़ियां भी समारोह की दिव्यता से होंगी परिचित
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर हुए समारोह की दिव्यता व भव्यता आने वाली पीढ़ियां भी जान सकेंगी। राममंदिर ट्रस्ट ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह की स्मारिका तैयार की है। स्मारिका को श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा स्व-अनुभूति का नाम दिया गया है। सोमवार को कारसेवकपुरम में आयोजित एक समारोह में स्मारिका का विमोचन किया गया। स्मारिका को विहिप से जुड़े देश-विदेश के 18 हजार संत-धर्माचार्यों को भेजने की योजना है। साथ ही स्मारिका का एक अनुपूरक अंक भी प्रकाशित किया जाएगा। तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि जो लोग प्राण-प्रतिष्ठा में सम्मिलित हुए उन्होंने अपनी अनुभूतियां लिखी हैं। कालांतर में यही इतिहास बनेगा। इसमें सभी महत्वपूर्ण निर्णयों का क्रम से तिथिवार उल्लेख किया गया है। न्यायालय का निर्णय भी जनमानस की समझ में आने वाली भाषा शैली में है। जगद्गुरु श्रीधराचार्य ने कहा कि 22 जनवरी को सारे विश्व के लोगों ने अनुभव किया कि राम जैसा आदर्श पूरे विश्व में कोई नहीं। महंत वेदेही बल्लभ शरण ने कहा कि राममंदिर निर्माण अयोध्या के इतिहास का अमिट हस्ताक्षर है। पांच सौ साल के संघर्ष के बाद रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं। ऐसा दिव्य मंदिर पूरे विश्व में एक ही है। महंत गौरीशंकर दास ने कहा कि यह स्मारिका गौरवशाली अतीत की गवाही देगी। प्राण प्रतिष्ठा अब अयोध्या का एक नया उत्सव बन गया है। समारोह का संचालन विहिप के अशोक तिवारी ने किया। समारोह में महंत मुरलीदास, महंत धर्मदास, महंत करुणा निधान शरण, जगद्गुरु परमहंसाचार्य, महंत गिरीश दास, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, राजूदास, राममंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र, सांसद लल्लू सिंह, मेयर गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक अभय सिंह, रामचंद्र यादव, , ऋषिकेश उपाध्याय आदि मौजूद रहे। शोध का विषय बनेगी स्मारिका महंत डॉ. भरत दास ने कहा कि यह स्मारिका भविष्य में शोध का विषय बनेगी। आगे की पीढ़ियां मंदिर निर्माण का संघर्ष जान सकेंगी। मंदिर निर्माण की संघर्ष यात्रा से लोग परिचित हो सकेंगे। यह स्मारिका सांस्कृतिक जनजागरण का भी माध्यम बनने जा रही है। महंत विवेक आचारी ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि राममंदिर का निर्माण देख पा रहे हैं। मंदिर आंदोलन में संत-धर्माचार्यों की भूमिका अहम रही है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तिथि रामनवमी की तरह ही अमिट हो चुकी है। यह स्मारिका समारोह की भव्यता की गवाही देगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 01, 2025, 21:02 IST
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