नक्सलियों की डेडलाइन: CM साय ने कहा- 31 मार्च नक्सलवाद के अंत का ऐतिहासिक दिन, डबल इंजन की ताकत से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 31 मार्च को छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि राज्य अब नक्सलवाद जैसे गहरे नासूर से बाहर निकलकर विकास, विश्वास और सुशासन के नए युग की शुरुआत कर रहा है। मुख्यमंत्री साय ने इस बड़ी उपलब्धि का सीधा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट रणनीति और अडिग इच्छाशक्ति को दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता उनके प्रति आभार व्यक्त करती है और डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक परिणाम मिले हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस विषय पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान को लेकर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनका बयान न केवल तथ्यहीन है, बल्कि अपनी विफलताओं को छिपाने का एक प्रयास भी है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार के समय न तो स्पष्ट रणनीति दिखी और न ही दृढ़ इच्छाशक्ति थी, जिसके कारण नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नक्सल विरोधी अभियान में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात का भी जिक्र किया। साय ने कहा कि भूपेश बघेल की इसे झुठलाने की कोशिश सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा है। दिसंबर 2023 में सरकार बदलते ही केंद्र और राज्य के बीच समन्वय स्थापित हुआ। इसके अगले ही महीने गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ पहुंचे, जहां नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि देश में कुल नक्सलवाद का 75 फीसदी से अधिक प्रभाव छत्तीसगढ़ में ही था। यह पूर्ववर्ती सरकार की नीतिगत विफलता का प्रमाण है। पूर्व सरकार पर नक्सलवाद बढ़ाने का आरोप मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि पूर्व सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में माओवाद के खिलाफ दृढ़ इच्छाशक्ति और सही नीयत से लड़ाई लड़ी होती, तो प्रदेश की स्थिति आज इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में नक्सलवाद सीमित स्तर पर सिमट चुका था, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसकी गंभीरता बनी रही। यह इस बात को दर्शाता है कि तत्कालीन सरकार ने केंद्र के साथ अपेक्षित सहयोग नहीं किया। नक्सलवाद के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ संघर्ष करने की इच्छाशक्ति का अभाव था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब भूपेश बघेल इस मुद्दे पर बयान दे रहे हैं, तो वे सरासर झूठ बोल रहे हैं। प्रदेश की जनता सच्चाई को भली-भांति जानती है। बस्तर का विकास और लक्ष्य की प्राप्ति नक्सलवाद ने दशकों तक छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर क्षेत्र के विकास को बंधक बनाकर रखा था। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बस्तर लगभग 40 वर्षों तक विकास से वंचित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है और बस्तर क्षेत्र विकास की मुख्यधारा में मजबूती से लौट रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया था। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज यह लक्ष्य जमीनी हकीकत में बदलता दिख रहा है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की मजबूत नीति, सटीक रणनीति और राज्य के सहयोग का परिणाम बताया। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता करार दिया गया है। राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नक्सलवाद जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर उनका रुख भ्रम पैदा करने वाला है। यह उनकी मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने तथाकथित भारत जोड़ो यात्रा के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल विचारधारा समर्थक तत्वों के साथ मंच साझा करने पर आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिडमा जैसे खूंखार नक्सली के मारे जाने के बाद “घर-घर में हिडमा पैदा होंगे” जैसे नारे लगना अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कृत्य यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं नक्सलवाद को लेकर एक खतरनाक नरमी या सहानुभूति दिखाई जा रही है, जो राष्ट्रहित के बिल्कुल विपरीत है। मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से स्पष्ट रुख अपनाने और देश की एकता एवं सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता न करने की अपील की।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 31, 2026, 22:06 IST
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