Dausa News: UGC कानून के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, भाजपा के झंडे जलाए; राष्ट्रपति से क्या मांग की?

दौसा की सड़कों पर रविवार को निकली रैली केवल एक विरोध मार्च नहीं थी, बल्कि माता–पिता की चिंता, युवाओं की आशंकाओं और समाज की पीड़ा की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कानून शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और समान अवसर के अधिकार पर प्रहार है। समाज के लोगों के अनुसार विगत एक सप्ताह से इस मुद्दे को लेकर बेचैनी लगातार बढ़ रही थी। 28 जनवरी को हुई बैठक में ही यह स्पष्ट हो गया था कि समाज के भीतर इस कानून को लेकर गहरी आशंका है। लोगों ने कहा कि उन्हें डर है कहीं उनके बच्चों से मेहनत, योग्यता और समान अवसर का अधिकार न छिन जाए। रैली और सभा में भविष्य को लेकर उठे सवाल रविवार को यही आशंका रैली और सभा के रूप में सामने आई। रैली में शामिल लोगों के चेहरों पर शिक्षा की निष्पक्षता को लेकर चिंता दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि शिक्षा व्यवस्था निष्पक्ष नहीं रही, तो उनके बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। लोगों ने कहा कि पहले से ही सवर्ण समाज विभिन्न सामाजिक और कानूनी दबावों का सामना कर रहा है और अब यूजीसी बिल के माध्यम से उनके बच्चों को शिक्षा की प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेलने की आशंका है। वक्ताओं ने इसे बच्चों के सपनों और माता–पिता की उम्मीदों से जुड़ा मुद्दा बताया। गांधी तिराए पर पुतले दहन और नारेबाजी रैली के गांधी तिराए पहुंचने पर युवाओं ने भाजपा के 16 अलग-अलग नेताओं के पुतले जलाए और भाजपा के झंडे भी जलाए। इस दौरान केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की गई। सभा को संबोधित करते हुए समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि राजनीति को समाज को बांटने का माध्यम नहीं बनना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि जाति और वर्ग के आधार पर विभाजन देश के लिए घातक हो सकता है। उनका कहना था कि शिक्षा को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने यूजीसी कानून को शिक्षा व्यवस्था पर असर डालने वाला कदम बताया और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की। पढ़ें-Rajasthan:खाटूश्यामजी में श्रद्धालुओं को लेकर भिड़े तीन युवक, धक्कामुक्की के बाद जमकर चली लाठियां; गिरफ्तार राष्ट्रपति से की हस्तक्षेप की मांग सभा और रैली के बाद सवर्ण समाज के प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में कानून को वापस लेने या उसमें न्यायपूर्ण संशोधन करने की मांग की गई। इसमें शिक्षा व्यवस्था को राजनीति से अलग रखने की अपील भी शामिल थी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि वे शिक्षा में योग्यता, समानता और न्याय बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार यदि शिक्षा से निष्पक्षता हटती है तो इसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ेगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 01, 2026, 15:19 IST
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