Agriculture : पहले चटक धूप और अब छाए बादल से गेहूं और सरसों की फसल पर संकट के बादल मंडराए

फरवरी के तीसरे पखवाड़े में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दो दिन पहले तक अचानक बढ़े तापमान ने गेहूं की फसल, विशेषकर पछेती बोआई वाली फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका पैदा कर दी थी। शुक्रवार को आसमान में छाए बादलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि अगर बारिश हुई तो खेतों में तैयार गेहूं और सरसों के साथ ही आलू की फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। आसमान में छाए बादलों ने बारिश की संभावना को भी प्रबल कर दिया है। अगले दो दिनों में बारिश की संभावना जताई जा रही है। जनपद में इस बार लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बोआई की गई है। हालांकि, सर्दी का सीजन बेहतर होने से अब तक फसल की पैदावार काफी बेहतर दिख रही थी, लेकिन अचानक चटक धूप और अब आसमान में छाए बादलों ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी का महीना गेहूं के लिए सबसे संवेदनशील होता है। क्योंकि, इस समय दाने भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। अगेती गेहूं की फसल वर्तमान में तकरीबन तैयार हो चुकी है और बालियां निकलने लगी हैं। ऐसे में अगर बारिश हुई तो गेहूं और सरसों की फसल खेत में ही बिछ जाएंगी। गंगा और यमुना पार में तो कई गांवों में सरसों की कटाई भी शुरू कर दी गई है। कोट प्रयागराज में गंगापार और यमुनापार को मिलाकर तकरीबन दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में गेहूं की पैदावार की जाती है। गेहूं के साथ-साथ इस वक्त आलू की फसल भी तैयार हो रही है लेकिन बारिश से इसकी फसल को नुकसान पहुंच सकता है। विशेष रूप से बारिश होने पर आलू में फंगस लगने की संभावना बढ़ जाती है। - पवन कुमार विश्वकर्मा, उप कृषि निदेशक, प्रयागराज

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 21, 2026, 14:03 IST
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