Holi 2025 : बिहार में बना यह रंग-अबीर नहीं करेगा नुकसान; कहां बन रहा, कैसे मिलेगा- यह जान लीजिए

होली का त्यौहार रंगों और गुलाल के बिना अधूरा सा लगता है, लेकिन बाजारों में बिकने वाले केमिकल युक्त गुलाल चेहरे के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। ऐसे में, समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने एक इको फ्रेंडली प्रयास किया है, जिसकी चर्चा खूब हो रही है। विश्वविद्यालय के अपशिष्ट प्रबंधन विभाग द्वारा हल्दी, चुकंदर और हरी साग सब्जियों से हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है, जो न केवल सुरक्षित है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को गुलाल बनाने का प्रशिक्षण भी देना शुरू किया है, ताकि वे घर बैठे हर्बल गुलाल का निर्माण करके रोजगार कमा सकें। यह पहल खासकर उन महिलाओं के लिए है जो ग्रामीण परिवेश में रहते हुए आर्थिक तौर पर सशक्त बनना चाहती हैं। हल्दी, चुकंदर और पालक बन रहा गुलाल डॉ. संगीता देव, वैज्ञानिक, ने बताया कि हल्दी, चुकंदर और पालक से गुलाल बनाने की प्रक्रिया सरल है और इसे घर में छोटे पैमाने पर भी तैयार किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, हल्दी से गुलाल बनाने के लिए कच्ची हल्दी को साफ करके उसका छिलका हटाया जाता है। फिर, जूसर मशीन से हल्दी का जूस निकाला जाता है और इसे अरारोट के साथ मिलाया जाता है। इस मिश्रण को 20 से 24 घंटे तक सूखाया जाता है। हल्दी के स्वाद को कम करने के लिए इसमें तुलसी और लेमनग्रास जैसे फ्लेवर भी डाले जाते हैं। इसके बाद, सूखा मिश्रण पाउडर रूप में तैयार होता है, जो कि सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होता है। वैज्ञानिक डॉ. वीणा शाही ने बताया कि गुलाबी गुलाल बनाने के लिए चुकंदर का उपयोग किया जाता है, जबकि हरे रंग के गुलाल के लिए पालक के पत्ते का प्रयोग होता है। विश्वविद्यालय में फिलहाल पीला, हरा और गुलाबी गुलाल बनाया जा रहा है, जो बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है। महिलाओं को दी जा रही विशेष ट्रेनिंग डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में चारमार्च से छह मार्च तक चलने वाले तीन दिनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 25 महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इन महिलाओं को यह प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रशिक्षित महिलाएं भविष्य में इसे कुटीर उद्योग के रूप में संचालित कर सकती हैं और होली के दौरान इसे बड़े पैमाने पर बेच सकती हैं। बिहार केबाजार में बढ़ी डिमांड डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयद्वारा तैयार किए गए हर्बल गुलाल की डिमांड बाजारों में बढ़ रही है। खादी ग्राम उद्योग के माध्यम से इसे देशभर के विभिन्न हिस्सों में बेचा जा रहा है, जिससे यह कम खर्च में ज्यादा मुनाफा देने वाला साबित हो रहा है। इस पहल से न केवल पर्यावरण को लाभ हो रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। आने वाले होली पर्व पर इस हर्बल गुलाल की और अधिक मांग हो सकती है, जो समाज में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाने का संकेत है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 05, 2025, 10:59 IST
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