Highcourt: वाहन हादसे में 81 प्रतिशत दिव्यांग हुआ चालक, हाईकोर्ट ने 17 साल बाद मुआवजा तीन गुना बढ़ाया

स्थायी दिव्यांगता केवल शारीरिक अक्षमता नहीं बल्कि जीवन की गरिमा, सामाजिक सहभागिता और भविष्य की संभावनाओं पर गहरा आघात है। ऐसे मामलों में न्यायालय का दायित्व है कि पीड़ित को न्यायोचित और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए जिससे वह सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सके। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल ड्राइवर को 17 वर्ष बाद बड़ी न्यायिक राहत देते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, पटियाला के वर्ष 2011 के मुआवजे में संशोधन कर दिया है। हाईकोर्ट ने मुआवजे में करीब 3 गुना बढ़ोतरी करते हुए 10,57,362 के मुआवजे को 35,17,706 रुपये कर दिया है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने फैसले में स्पष्ट किया कि स्थायी दिव्यांगता के मामलों में पीड़ित की आय, भविष्य की संभावनाओं और असहनीय पीड़ा का समुचित आकलन किया जाना आवश्यक है। याची भूपिंदर सिंह 2 दिसंबर 2008 को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए और दोनों पैरों को कुचलने जैसी गंभीर चोटें आईं। चिकित्सकों ने उन्हें 81 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग घोषित किया और मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने 10 मई 2011 को 10,57,362 रुपये मुआवजा तय किया। इसके खिलाफ अपील में हाईकोर्ट ने पाया कि अधिकरण ने आय का निर्धारण अनुमान के आधार पर 3,000 रुपये प्रतिमाह किया था जबकि उस समय पंजाब में कुशल श्रमिक के लिए न्यूनतम वेतन अधिक था। हाईकोर्ट ने कुल मुआवजा 35,17,706 रुपये निर्धारित किया। हाईकोर्ट ने 24,60,344 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश पारित किया और कहा कि यह राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दावा याचिका दायर करने की तिथि 2011 से अदा की जाएगी। बीमा कंपनी को दो माह के भीतर राशि अधिकरण में जमा कराने और तत्पश्चात पीड़ित को भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 04, 2026, 13:55 IST
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