चिप की दुनिया में भारत की धमक: जापान-यूरोप की कंपनियां साथ, किए 16 समझौते; देश में तैयार होगी पूरी व्यवस्था
भारत में सेमीकंडक्टर बनाने की तैयारी अब सिर्फ चिप कारखाने लगाने तक सीमित नहीं है। चिप बनाने के लिए जरूरी मशीन, रसायन, सामग्री, गैस और पैकेजिंग तकनीक भी देश में लाने की तैयारी है। सेमीकॉन 2.0 के पहले दिन दुनिया में भारत की धमक भी देखने को मिली। कई भारतीय कंपनियों के साथ दुनिया के दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियों ने समझौता किया। खासतौर पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने जापान, यूरोप, मलेशिया और सिंगापुर की कंपनियों के साथ 16 समझौते किए हैं। चिप से पहले तैयार होगी पूरी व्यवस्था : भारत में इस समय चिप निर्माण की कई परियोजनाएं एक साथ आगे बढ़ रही हैं। गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पीएसएमसी की करीब 91 हजार करोड़ रुपये की चिप फैक्टरी तैयार हो रही है। यहां 90, 55 और 28 नैनोमीटर तकनीक वाले चिप बनाने की योजना है। इसकी प्रस्तावित क्षमता करीब 50 हजार वेफर प्रतिमाह है। वहीं, असम में टाटा की सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाई भी तैयार हो रही है। इसकी क्षमता करीब 4.8 करोड़ इकाई प्रतिदिन बताई गई है। यानी भारत में अब सिर्फ चिप बनाने की फैक्टरी नहीं लग रही है। उसके लिए जरूरी रसायन, मशीन, विशेष सामग्री, गैस, पानी और पैकेजिंग तकनीक की व्यवस्था भी देश में विकसित की जा रही है। कौन सी कंपनी भारत में क्या करेगी नेक्सपीरिया : ये बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले सेमीकंडक्टर बनाती है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, चार्जिंग व्यवस्था, बिजली प्रबंधन और औद्योगिक उपकरणों में होता है। आपूर्ति और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम होगा। बीईएसआई : ये चिप बनाने के बाद उसे अंतिम रूप देने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बनाती है। कंपनी की तकनीक से चिप को दूसरे हिस्सों से जोड़ा और पैकेज में बंद किया जाता है। अजीनोमोटो : अजीनोमोटो बिल्ड-अप फिल्म का इस्तेमाल चिप के पैकेज में किया जाता है। यह चिप के अलग-अलग हिस्सों के बीच विद्युत संपर्कसे अलग रखने में मदद करती है। केलिंगटन : मलेशिया की केलिंगटन सेमीकंडक्टर कारखानों के लिए जरूरी औद्योगिक सुविधाएं तैयार करती है। इसमें विशेष गैस, रसायन और अत्यधिक शुद्ध पानी की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था शामिल है। असेंडास और फर्स्ट स्पेस : सिंगापुर की ये कंपनियां औद्योगिक ढांचे और सुविधाओं के विकास में भूमिका निभाएंगी। मकसद चिप से जुड़े कारखानों के लिए जरूरी वातावरण तैयार करना है। जेएसआर : जापान की जेएसआर चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले फोटोरेजिस्ट और दूसरी विशेष सामग्री बनाती है। इसकी की मदद से चिप पर बेहद महीन सर्किट तैयार की जाती हैं। फुजीफिल्म : ये सेमीकंडक्टर कारखानों में इस्तेमाल होने वाली सफाई सामग्री और सतह को समतल करने वाली सामग्री बनाती है। भारत में ऐसी सामग्री की आपूर्ति कारखानों के लिए अहम होगी। सुमितोमो केमिकल सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए विशेष रसायन और कंपाउंड से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराती है। जिसका इस्तेमाल खास तरह के चिप और बिजली से जुड़े उपकरणों में होता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 18, 2026, 04:14 IST
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