लोकायुक्तः करोड़ों की संपत्ति वाले कांस्टेबल के करीबी अधिकारियों पर भी नजर, भोपाल से चलेगी जांच

इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कांस्टेबल चालक फिरोज खान की लगभग 65 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब लोकायुक्त मुख्यालय भोपाल से इसकी सीधी मॉनिटरिंग की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि एक चालक पद पर तैनात कर्मचारी के पास इतनी विशाल संपत्ति कैसे एकत्र हुई। फिरोज के परिवार की शादी, पार्टी और उसके अन्य आयोजनों में आने वाले करीबी अधिकारी भी अब जांच के दायरे में आ चुके हैं। पत्नी, परिचितों और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल लोकायुक्त की टीम फिरोज खान से जुड़ी अन्य संभावित संपत्तियों के साथ-साथ उनकी पत्नी हिना खान, महिला मित्रों और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच का मुख्य केंद्र जमीनों की खरीद-फरोख्त में हुई गड़बड़ियों और स्टाम्प ड्यूटी में बरती गई कथित अनियमितताओं पर है। सूत्रों के अनुसार कुछ जमीनों के सौदों के माध्यम से शासन को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई गई है। एजेंसी यह पता लगा रही है कि रजिस्ट्री में दर्ज राशि, बाजार दर और जमा की गई स्टाम्प ड्यूटी में क्या अंतर था। स्कीम 94 की संपत्ति और मृत महिला की जमीन पर फोकस जांच के दौरान इंदौर के स्कीम 94 स्थित एक बहुमूल्य संपत्ति के लेन-देन का मामला सामने आया है जिस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा मगरखेड़ा निवासी कस्तूरी बाई नामक महिला की जमीन से जुड़ा संवेदनशील मामला भी सामने आया है। कस्तूरी बाई की मृत्यु हो चुकी है और अब इस जमीन के क्रय-विक्रय तथा उससे संबंधित सभी कानूनी दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। हालांकि इस जमीन से जुड़ी किसी गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। रजिस्ट्रियों में गवाही और फर्मों के नाम पर खरीदी गई जमीनें फिरोज खान से जुड़े कई नए नाम जांच में सामने आ चुके हैं। कुछ जमीनों की रजिस्ट्रियों में फिरोज खान स्वयं गवाह के रूप में दर्ज हैं। जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि वे विक्रेता पक्ष से गवाह बने थे या क्रेता पक्ष की ओर से। इसके साथ ही यह जानकारी भी सामने आई है कि कुछ संपत्तियां उनकी पत्नी से जुड़ी व्यावसायिक फर्म के नाम पर खरीदी गई थीं। इन संपत्तियों को खरीदने में उपयोग किए गए धन के वास्तविक स्रोतों का पता लगाया जा रहा है। 46 अचल संपत्तियों की पुष्टि और भोपाल मुख्यालय की नजर लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में अब तक कुल 46 अचल संपत्तियों की जानकारी उजागर हुई है। एजेंसी इन सभी संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और आय के ज्ञात स्रोतों से उनके तालमेल का मूल्यांकन कर रही है। वित्तीय लेन-देन से जुड़े नए सुरागों और सोशल मीडिया पर आ रहे दावों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। फिलहाल स्टाम्प ड्यूटी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है, जिसके बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आ सकेंगे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 21, 2026, 08:27 IST
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