Mahakumbh : मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करता है महाकुंभ का वातावरण, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का दावा

महाकुंभ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक अद्भुत वैज्ञानिक चमत्कार भी है। एक शोध के आधार पर पद्मश्री वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर ने यह दावा किया है कि महाकुंभ का वातावरण मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करता है। महाकुंभ में गंगाजल को अल्कलाइन वॉटर से ज्यादा शुद्ध होने का दावा करने वाले प्रयागराज के वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर ने इस महाआयोजन को लेकर यह दावा भी किया है कि तनाव और जीवनशैली संबंधी समस्याओं से डीएनए क्षतिग्रस्त हो सकता है। महाकुंभ के सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र में सामूहिक साधना और वातावरण डीएनए को प्राकृतिक स्वरूप में पुनर्स्थापित कर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। करोड़ों लोगों की एक साथ उपस्थिति, शंखनाद व घंटे घंटियों की ध्वनि, गंगा जल में पवित्र स्नान सभी मिलकर एक ऐसा ऊर्जावान वातावरण बनाते हैं जो न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि शरीर और मस्तिष्क को भी गहराई से प्रभावित करता है। डॉ. सोनकर ने बताया कि अल्फा तरंगें मस्तिष्क की तरंगें होती हैं। जब महाकुंभ में करोड़ों लोगों के मस्तिष्क की अल्फा तरंगें आपस में मिलती हैं तो वे एक विशाल सामूहिक ऊर्जा क्षेत्र का निर्माण करती हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 17, 2025, 13:14 IST
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