मनुष्य को हर समय करना चाहिए भगवान का स्मरण : शास्त्री

कुरुक्षेत्र। गौ गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में सेक्टर-आठ के गौरी शंकर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्रद्धालुओं को प्रभुभक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हर समय भगवान का स्मरण करना चाहिए।उन्होंने कहा कि हिरण्याक्ष के बेटे का नाम कालनेमि था। असुर कालनेमि के छह बेटे और एक बेटी हुई। बेटी का नाम वृंदा था। वृंदा का विवाह जालंधर राक्षस से हुआ था, जिसका बाद में भगवान विष्णु ने वरण किया और वह तुलसी वृंदावन कहलाई। कथावाचक ने बताया कि कालनेमि बहुत दुष्ट था। स्कंद पुराण की एक कथा के अनुसार उसने दैत्यों की सेना के साथ देवताओं पर आक्रमण कर दिया था। उसका इरादा अमृत कलश को देवताओं से छीनने का था। इस पर क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने उसका अंत कर दिया। कालनेमि के छह बेटे यानी हिरण्याक्ष के पोते उसके असुर स्वरूप से परिचित थे। इसीलिए उन्होंने उसका गुणगान करने से मना कर दिया था। इस कारण उन सभी को हिरण्याक्ष ने श्राप दिया था कि वे पातालवासी हो जाएं, लेकिन कालनेमि के पुत्रों ने बहुत पुण्य कर्म किए थे, जिसके प्रभाव से उन पर इस श्राप का अलग प्रभाव पड़ा। हिरण्याक्ष ने देवी पृथ्वी को बहुत परेशान किया था, जिसके कारण भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष को पानी में डुबोकर मार डाला था। इसके बाद कालनेमि ने राजा उग्रसेन और उनकी पत्नी पद्मावती के घर में कंस के रूप में जन्म लिया। इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के पूर्व सदस्य सूरजभान कटारिया, निर्मला, नरेश गर्ग, मीनू, संरक्षक जयनारायण शर्मा, बलवंत सिंह, वीपी गौड़, पूर्व प्रधान श्याम सुंदर तिवारी, राकेश सैनी, जगमाल चंदेल, सरोज सैनी और सरिता शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 18, 2026, 03:42 IST
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