Updates: गुवाहाटी में कार-ट्रक टक्कर से 3 महिलाओं की मौत; चारमीनार एक्सप्रेस में धुआं-चिंगारी से ट्रेन रोकी गई
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सार्थक समाज कल्याण के लिए ज्ञान और कर्म के साथ भक्ति का एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस संगम को 'त्रिवेणी' की संज्ञा दी, जो समाज के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण है। नागपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) विदर्भ प्रांत द्वारा यशवंतराव केलकर की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित "प्रिय यशवंतराव" कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि भक्ति के आधार के बिना ज्ञान विनाशकारी हो सकता है और कर्म अव्यवस्थित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति, शक्ति और ज्ञान दोनों को दिशा और बल प्रदान करती है। भागवत ने स्पष्ट किया, "भक्ति के बिना ज्ञान उपयोगी नहीं है, यह शरारती हो जाता है। भक्ति के बिना कर्म में व्यवस्था नहीं होती।" उन्होंने समझाया कि भक्ति ही मनुष्य के श्रम के अंतिम उद्देश्य को निर्धारित करती है, यह सुनिश्चित करती है कि प्रयास स्वार्थी या अराजक उद्देश्यों के बजाय 'लोक संग्रह' यानी समाज के व्यापक हित की ओर निर्देशित हों।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 26, 2026, 07:11 IST
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