'चुनाव आएंगे-जाएंगे, देश अमर रहेगा': पीएम मोदी की इन लाइनों पर क्यों याद आए अटल बिहारी? पढ़ें 1996 का भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए करीब 1 घंटा 27 मिनट का भाषण दिया। इस दौरान विपक्ष ने नारेबाजी की, लेकिन पीएम मोदी ने शांति बनाए रखते हुए अपने दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साझा किया। 'चुनाव आएंगे-जाएंगे, देश अजर-अमर रहेगा' पीएम मोदी ने कहा कि उनका लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत बनाना है। उन्होंने वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। पीएम ने कहा कि हम दिशा तय करके चलते हैं। हमारे लिए अगला चुनाव लक्ष्य नहीं होता, हमारा लक्ष्य 2047 काविकसित भारत है। चुनाव आएंगे, जाएंगे, देश अजर-अमर रहेगा। आज जो गर्भ में बालक है, उसे देखकर भी मैं काम करता हूं कि समृद्ध भारत देकर जाऊं। जिसके बाद से ही1996 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक भाषण को याद किया जाने लगा। ये भी पढ़ें:-मोदी के शब्द बाण:शातिर युवराज से सरनेम चुराने वाले तक, विपक्ष पर किया PM का हर प्रहार, इन्फोग्राफिक्स में भारत की वैश्विक स्थिति और क्रिटिकल मिनरल्स प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत अब दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ अब राजनीतिक हथियार बन गए हैं और भारत इस पर भी काम कर रहा है ताकि कभी किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। पढ़ें अटल बिहारी का 1996 का भाषण गौरतलब है कि 1996 में 13 दिन चली सरकार के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 31 मई 1996 को लोकसभा में यह भाषण दिया था। इसमें उन्होंने कहा, ''देश आज संकटों से घिरा है और ये संकट हमने पैदा नहीं किए हैं। जब-जब कभी आवश्यकता पड़ी, संकटों के निराकरण में हमने उस समय की सरकार की मदद की है। उस समय के प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव जी ने भारत का पक्ष रखने के लिए मुझे विरोधी दल के नेता के नाते जिनेवा भेजा थाऔर पाकिस्तानी उसे देखकर चमत्कृत रह गए। उन्होंने कहा कि ये कहां से आए हैं। क्योंकि उनके यहां विरोधी दल का नेता ऐसे राष्ट्रीय कार्यों में भी सहयोग देने के लिए तैयार नहीं होता, वो हर जगह अपनी सरकार को गिराने में लगा रहता है। ये हमारी परंपरा नहीं है, ये हमारी प्रकृति नहीं है। और मैं चाहता हूं कि ये परंपरा बनी रही, ये प्रकृति बनी रहे। सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर ये देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।"
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 05, 2026, 18:22 IST
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