Hardoi News: तिहरे हत्याकांड में सदर निबंधक को कोर्ट में पेश होने का नोटिस, मांगा गया स्पष्टीकरण

हरदोई। टड़ियावां थाना क्षेत्र के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में अदालत ने निबंधक सदर के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। हत्या की जड़ मानी जा रही वसीयत को प्रमाणित कराने के लिए बार-बार बुलाए जाने के बावजूद निबंधक सदर कोर्ट में पेश नहीं हुए। एससी-एसटी अधिनियम के विशेष न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने नाराजगी जाहिर की है। न्यायालय की अवमानना करार दिया है। अदालत ने निबंधक सदर को 21 मई व्यक्तिगत रूप से तलब कोर्ट में तलब किया है। कोर्ट की अवमानना पर सात दिन के लिए जेल भेजने की भी चेतावनी दी है।एससी-एसटी एक्ट कोर्ट ने आदेश में साफ कहा कि समन की सूचना कर्मचारी के माध्यम से प्राप्त किए जाने के बाद भी जानबूझकर आदेश का पालन नहीं किया गया। इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा माना है। बरूआर गांव निवासी ओम शंकर ने एक नवंबर 2020 को टड़ियावां थाना पुलिस में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि ग्राम पंचायत कुआंमऊ के पास हुलासी बगिया आश्रम है। इसमें बाबा हरिदास (70), इनकी शिष्या मीरादास (65) और पुत्र नेतराम (45) रहते थे। बाबा झाड़-फूंक करते थे और सोमवार को गद्दी भी लगाते थे। एक नवंबर की सुबह करीब साढ़े पांच बजे मझिला थाना क्षेत्र के रौतापुर गांव निवासी रक्षपाल ने आकर बताया कि तीनों की किसी ने ईंट-पत्थरों कूच कर हत्या कर दी है। इस पर ओम शंकर मौके पर गया तो देखा कि तीनों के शव आश्रम के अंदर पड़े थे। ओम शंकर ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था।दो नवंबर को पुलिस ने शक के आधार पर रक्षपाल को गिरफ्तार किया था। कड़ाई से पूछताछ करने पर रक्षपाल ने बताया था कि वह एक मामले में जेल में बंद था। 2019 में छूट कर घर आया, इसके बाद बाबा से जान पहचान हुई। आश्रम में रहकर ही बाबा की एक वर्ष तक सेवा की थी। बाबा ने रक्षपाल को 16 बीघा जमीन बटाई पर दी थी। कुछ दिन बाद बाबा ने सात बीघा जमीन रक्षपाल के नाम करने के लिए कहा था। यह बात रक्षपाल ने पिहानी थाना क्षेत्र के बंदरहा गांव निवासी राजीव सिंह को बताई थी। राजीव सिंह ने कहा कि बाबा से हमें मिलवाओ बाबा को ट्रस्ट बनाने की सलाह दूंगा, इसी आधार पर अंगूठा लगवा लूंगा। इसके आधार पर फर्जी वसीयत करवा लूंगा। योजना के तहत बाबा हीरा दास व उनके बेटे नेतराम का अंगूठा लगाकर फर्जी वसीयत अपने नाम करा ली थी। इसी बीच पता चला कि बाबा ने अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति की वसीहत शिष्या मीरादास के नाम कर दी। इससे क्षुब्ध होकर 31 अक्तूबर की रात अपने दोस्त सुरसा थाना क्षेत्र के ढोलिया गांव निवासी सफीक व कोतवाली शहर के नीर बहार निवासी अपने साले संजय को लेकर आश्रम पर गया था। हीरादास व बेटा नेतराम बाहर चारपाई पर और उनकी शिष्या मीरादास अंदर लेटी थी। हीरादास व नेतराम का मुंह दबाकर अंदर ले गए ईंट-पत्थरों से वार कर अधमरा कर दिया था। चाकुओं से भी हमला किया था, इससे तीनों की मौत हो गई थी। बयानों के आधार पर ही पुलिस ने रक्षपाल, राजीव, संजय, सफीक, हरिराम समेत पांचों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसमें राजीव, संजय, हरिराम व रक्षपाल की जमानत हो गई है। सफीक अभी भी जेल में बंद है। जिस वसीयत को बाबा ने अपनी शिष्या के नाम किया था, उसको प्रमाणित करने के लिए निबंधक सदर को बुलाने के लिए विशेष लोक अभियोजक ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने 20 अप्रैल को निबंधक सदर को 4 मई 2026 को बुलाया था। उपस्थित न होने पर 7 मई को पेशी नियत की गई थी, इस पर भी उपस्थित न होने पर अपर जिला जज ने निबंधक सदर को नोटिस भेजकर 21 मई को तलब किया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 07, 2026, 18:38 IST
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