नेपाल त्रासदी: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कटघरे में सद्गुरु, तीर्थयात्रियों की हिफाजत पर फाउंडेशन की सफाई क्या?

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण भोटे कोशी नदी की बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच ईशा फाउंडेशन ने सफाई देते हुए कहा है कि सद्गुरु ने तत्काल तिब्बत से बाहर निकलने के बजाय वहां रुकने का फैसला इसलिए किया, ताकि फंसे हुए 700 से अधिक सदस्यों की सुरक्षित वापसी का रास्ता सुनिश्चित किया जा सके। सरकार के दबाव के बावजूद क्यों रुके सद्गुरु ईशा सेक्रेड वॉक्स की समन्वयक मां गंभीरि ने एएनआई को बताया कि भारत सरकार की ओर से सद्गुरु को तत्काल बाहर निकलने के लिए दबाव था। हालांकि, सद्गुरु की प्राथमिकता अलग थी। वह उस क्षेत्र के करीब जाना चाहते थे, जहां हादसा हुआ था, ताकि बचाव प्रयासों में मदद मिल सके। उनके मुताबिक, तिब्बत में ईशा फाउंडेशन के 700 से अधिक सदस्य मौजूद थे। ऐसे में सद्गुरु चाहते थे कि उनके लिए भी तिब्बत से बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता तैयार हो।मां गंभीरि ने बताया किसद्गुरु तिब्बत से नेपाल लौट आए हैं और फिलहाल काठमांडू में हैं।सद्गुरु हादसे वाली जगह यानी ग्राउंड जीरो तक पहुंचकर हर संभव मदद करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने सड़क मार्ग से वहां जाने की इच्छा जताई थी। 77 यात्रियों की जानकारी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती क्यों बनी फाउंडेशन के अनुसार, हादसे के दौरान उसके 77 प्रतिभागी सीधे प्रभावित हुए थे। संगठन इन लोगों की स्थिति की जानकारी हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा था। मां गंभीरि ने कहा कि सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि संगठन की टीम हादसे वाली जगह तक सीधे नहीं पहुंच पा रही थी। चीनी सेना और आधिकारिक बचाव दलों ने इलाके को अपने नियंत्रण में ले रखा था, जिसके चलते वहां जाने के लिए जरूरी अनुमति नहीं मिल सकी। फाउंडेशन ने बताया कि वह चीनी मीडिया की तस्वीरों, वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के जरिए घटनास्थल की स्थिति समझने की कोशिश कर रहा था। Namaskaram, With a very heavy heart, we share the below update for all the well wishers of the Kailash Sojourn's group, which was at the Gyirong Port at the time of the devastating calamity. As we continue to monitor the situation, Sadhguru and the whole Isha community stand… pic.twitter.com/WQWMc9bynj — Isha Foundation (@ishafoundation) August 29, 2026 क्या फाउंडेशन को 77 लोगों की आधिकारिक जानकारी मिली ईशा फाउंडेशन ने कहा कि उसे अब तक इन 77 सदस्यों के बारे में कोई स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। संगठन के मुताबिक, परिवारों के लिए यह इंतजार बेहद मुश्किल है और उन्हें उपलब्ध जानकारी लगातार साझा करने की कोशिश की जा रही है। फाउंडेशन ने अलग-अलग देशों से आए यात्रियों के परिवारों के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक फोन कॉल संभाल रहे हैं और जरूरत पड़ने पर परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क भी कर रहे हैं। काठमांडू और ग्यिरोंग में टीमें तैनात ईशा फाउंडेशन ने जानकारी जुटाने के लिए काठमांडू में एक टीम बनाई है। इसके अलावा तिब्बत की ओर ग्यिरोंग के करीब भी एक टीम तैनात की गई है, जो वहां से मिलने वाली सूचनाओं को जुटाकर संगठन तक पहुंचा रही है। फाउंडेशन के अनुसार, दोनों तरफ मौजूद ग्राउंड टीमों ने घटनास्थल की तबाही से जुड़े फोटो और वीडियो की भी पुष्टि की है। ईशा फाउंडेशन ने सोशल मीडिया पर जारी एक अपडेट में बताया कि ग्यिरोंग पोर्ट पर चीनी अधिकारियों का सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन 28 अगस्त को दोपहर के आसपास दोबारा शुरू हुआ। इससे पहले दूसरे दौर की बाढ़ के खतरे के कारण बचाव अभियान कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। फाउंडेशन ने कहा कि अब तक मिले संकेत इमिग्रेशन कार्यालय वाले इलाके में जीवित बचे लोगों की संभावना को लेकर उत्साहजनक नहीं हैं। हालांकि, संगठन ने कहा कि हेल्पलाइन और स्वयंसेवकों के जरिए परिवारों की मदद का काम लगातार जारी है। भारत ने भी बढ़ाए राहत और बचाव प्रयास 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान तेज किया गया है। भारत की ओर से भी नेपाल को राहत सामग्री और बचाव सहायता भेजी जा रही है। इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोगों की सुरक्षा और लापता यात्रियों की जानकारी को लेकर परिवार लगातार अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 30, 2026, 04:57 IST
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