विदेश के समाचार: फलस्तीन समर्थक छात्रों का अमेरिकी वीजा रद्द नहीं होगा; अफ्रीकी देश नाइजर में सैनिक विद्रोह
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा कि फलस्तीन के समर्थन और इस्राइल की आलोचना करने वाले विदेशी छात्रों के वीजा रद्द करना और उन्हें देश से निकालने की कार्रवाई शुरू करना असांविधानिक है।कैलिफोर्निया के सैन जोस में जिला जज नोएल वाइज ने ट्रंप प्रशासन की वीजा रद्द करने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की भारतीय छात्रा रजनी श्रीनिवासन समेत कई छात्रों के वीजा रद्द हुए थे। जज ने अपने फैसले में कहा कि विदेश विभाग और गृह सुरक्षा विभाग ने आव्रजन कानून की धाराओं का इस्तेमाल उन गैर-अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ किया, जिनकी राय सरकार दबाना चाहती थी। अमेरिका में सरकार और उसके नेताओं की आलोचना की आजादी लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। जब नागरिकों और गैर-नागरिकों को सरकार की कार्रवाई के डर से अपनी बात रोकनी पड़े, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। अदालत ने माना कि वीजा रद्द करने का आधार किसी व्यक्ति की विचारधारा या भाषण को बनाना असांविधानिक है। नाइजर में सैनिकों की बगावत: राष्ट्रपति भवन के पास घंटों चली गोलियां, अफसरों को बनाया बंधक पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर में शनिवार तड़के कुछ सैनिकों ने अपने अधिकारियों के खिलाफ बगावत कर दी। उन्होंने राजधानी नियामी के एक अहम सैन्य अड्डे पर अधिकारियों को बंधक बनाया और राष्ट्रपति भवन समेत शहर के कई संवेदनशील ठिकानों पर गोलीबारी की। बाद में अधिकारियों ने दावा किया कि स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया है। रक्षा मंत्री जनरल सालिफू एम ने बताया कि कुछ सैनिकों ने डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्थित सैन्य अड्डे बेस 101 में कुछ अधिकारियों को बंधक बना लिया था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति भवन समेत राजधानी के संवेदनशील ठिकानों पर भी गोलीबारी की। रक्षा मंत्री सालिफू ने इसे सैन्य अनुशासन और नियमों का उल्लंघन बताया। घटना के बाद सुरक्षाबलों को हवाईअड्डे और पठार इलाके में तैनात किया गया। नियामी जाने वाली एक प्रमुख सड़क को भी बंद कर दिया गया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 30, 2026, 05:20 IST
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