SC: 'अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में गहन जांच की जरूरत', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में एक गहन जांच की जरूरत है। यह मामला तब सामने आया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बताया कि सात मामलों में अनुमानित कुल नुकसान लगभग 27,337 करोड़ रुपये है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ, पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले एडीएजी फर्मों द्वारा 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित ऋण धोखाधड़ी में अदालत की निगरानी वाली जांच की मांग की गई थी। ये भी पढ़ें:Supreme Court Updates:हत्या के दोषी को शीर्ष अदालत ने दी जमानत, हाई कोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर चिंता वकील प्रशांत भूषण ने अनिल अंबानी को गिरफ्तार न करने पर उठाए सवाल याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों ने इसे 27,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया है। अनिल अंबानी को इसका किंगपिन कहा है, लेकिन अभी तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। पीठ ने इस बात पर गौर किया कि शीर्ष अदालत ने बार-बार कहा है कि जब तक जांच एजेंसी की ओर से गिरफ्तारी की मांग नहीं की जाएगी, वह इसका निर्देश देने में संकोच करेगी। पीठ ने कहा कि जांच को सनसनीखेज बनाने के बजाय, ध्यान जांच और प्रासंगिक सामग्री के संग्रह पर होना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि किसी मामले में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता जांच एजेंसी के विवेक पर छोड़ दी जानी चाहिए। नौ एफआईआर दर्ज, सात में चल रही जांच :सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जांच एजेंसियों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ एसबीआई द्वारा दर्ज शिकायतों पर दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। उन्होंने कहा, "कुल नौ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें से सात जांच के अधीन हैं और दो में आरोप पत्र दायर किए जा चुके हैं। सात मामलों में, कुल 27,337 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।" मेहता ने बताया कि त्वरित जांच के लिए कई जांच अधिकारियों की कई टीमें बनाई गई थीं, और जिन सात मामलों में जांच चल रही थी, उनमें 14 स्थानों पर तलाशी ली गई थी। उन्होंने कहा कि 31 लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं और इन मामलों में लगभग 3,960 दस्तावेज एकत्र किए गए हैं। मेहता ने यह भी बताया कि इन मामलों में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और उन्होंने इन सात मामलों में आरोप पत्र दायर करने के लिए एक अस्थायी समय-सीमा भी दी। ये भी पढ़ें:नोएडा हिंसा मामला:'हाईकोर्ट जाइए, यहां पहले ही 93000 केस लंबित', शीर्ष कोर्ट का छात्रा को जमानत देने से इनकार अनिल अंबानी के वकील कपिल सिब्बल क्या बोले अनिल अंबानी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब संबंधित अदालत ने अभी तक आरोप पत्र पर संज्ञान नहीं लिया है, तो याचिकाकर्ता को एक आरोप पत्र की प्रति कैसे मिल सकती है। सिब्बल ने कहा कि अनिल अंबानी हर तरह से जांच में सहयोग कर रहे हैं और संभव है कि उन्हें धोखा दिया गया हो। पीठ ने कहा कि इस मामले में एक गहन जांच की आवश्यकता है और एजेंसियों को इसे समयबद्ध तरीके से करना चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे। पीठ ने यह भी कहा कि अगर अदालत को लगता है कि जांच में कमी है, तो वह आगे हस्तक्षेप कर सकती है। अन्य वीडियो
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 08, 2026, 13:44 IST
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