Weather Woes : गर्मी ने दिखाया रंग तो बिजली कंपनियों ने तैयार किया एक्शन प्लान, पीक डिमांड पूरी करने की चुनौती

गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग का भी अनुमान है कि इस साल दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ेगी। इसे देखते हुए बिजली कंपनियों को भी दिल्ली में रह रहे करीब दो करोड़ लोगों को बिजली की आपूर्ति करना किसी चुनौती से कम नहीं होगी। एक अनुमान के अनुसार इस साल 9000 मेगावॉट से अधिक बिजली की मांग पहुंच सकती है। ऐसे में बिजली कंपनियों ने अभी से ही कमर कस ली है। उधर, दिल्ली में सत्ता बदलने से भी बिजली कंपनियों पर दबाव बना हुआ है। लिहाजा टाटा पावर और रिलायंस ने बिजली आपूर्ति के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है और दावा किया है कि पीक डिमांड में भी बिजली की कटौती नहीं होगी। बीआरपीएल क्षेत्र में ही बिजली की मांग 4000 मेगावॉट से भी अधिक होने की उम्मीद है। इसी तरह बीवाईपीएल इलाके में भी बिजली की मांग 1900 मेगावॉट तक पहुंचने की संभावना है। उधर, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के इलाके में 2562 मेगावॉट की जरूरत होगी। इसे देखते हुए आकस्मिक जरूरत के अलावा 2850 मेगावॉट बिजली की व्यवस्था दीर्घकालीन, मध्य अवधि और अल्प अवधि के समझौते के माध्यम से की है। बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए वॉर रूम तैयार : बिजली की मांग को देखते हुए बिजली कंपनियों ने एक वॉर रूम तैयार किया है। इसके लिए दीर्घकालिक पावर परचेज अग्रीमेंट के अलावा अन्य राज्यों के साथ पावर बैंकिंग की व्यवस्था भी है। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के डाटा का लगातार मॉनीटरिंग किया जा रहा है। बीएसईएस के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम रियल टाइम आधार पर बिजली आपूर्ति की माॅनिटरिंग कर रही है। इसके अलावा फील्ड टीमों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। यह भी कहा है कि दिल्ली की बिजली कंपनियों को केंद्रीय उर्जा मंत्रालय की ओर से सर्वश्रेष्ठ रेटिंग 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए मिला है। बिजली कंपनियों ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी तैयार किया है। स्टैंड-एलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से इलाके के उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। बिजली आपूर्ति के लिए एक्शन प्लान बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बीएसईएस ने तैयारी पूरी की है। दावा किया है कि बिजली की पर्याप्त व्यवस्था की गई है ताकि गर्मियों में दक्षिण, पश्चिम, मध्य और पूर्वी दिल्ली में रहने वाले लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीकों की भी मदद ली जाएगी। पारंपरिक पावर प्लांटों के अलावा 2100 मेगावॉट अक्षय ऊर्जा से बिजली का उत्पादन किया जाएगा। सौर ऊर्जा प्लांटों से 888 मेगावॉट, हाइड्रो प्लांटों से 546 मेगावॉट बिजली की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 500 मेगावॉट पवन उर्जा से ली जाएगी। उपभोक्ताओं के घरों की छतों पर लगे रूफटॉप सोलर पैनलों से भी 197 मेगावॉट बिजली सुनिश्चित की जाएगी। पावर बैंकिंग के माध्यम से 500 मेगावॉट तक बिजली मिलेगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 02, 2025, 06:45 IST
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