पश्चिम एशिया में और बढ़ेगी जंग की आग?: कूर्द समूहों को उतारने की तैयारी में ट्रंप, ईरान के लिए खतरनाक कैसे?

अमेरिका- इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के छठे दिन पश्चिम एशिया का संघर्ष और जटिल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान और इराक के कई कुर्द समूहों के नेताओं से हालिया बातचीत की खबरों के बीच ईरान ने इराक के स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित कुर्द ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। तेहरान इन समूहों को ईरान विरोधी अलगाववादी ताकतें बता रहा है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन इन कुर्द संगठनों का उपयोग ईरान के भीतर सैन्य दबाव बढ़ाने और संभावित विद्रोह को बढ़ावा देने के लिए कर सकता है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के बाद क्षेत्रीय संघर्ष तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। ईरान ने इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद कुर्द संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान के सरकारी टीवी चैनल प्रेस टीवी के अनुसार तेहरान ने ईरान विरोधी अलगाववादी ताकतों पर हमले किए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी मिसाइलें कुर्दिस्तान क्षेत्र के शहर सुलैमानिया तक पहुंचीं। 30 ड्रोन हमले की जानकारी ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने सेना के बयान के हवाले से बताया कि इराकी कुर्दिस्तान में क्रांति विरोधी कुर्द समूहों के मुख्यालय को तीन मिसाइलों से निशाना बनाया गया। इससे पहले बुधवार को ईरानी सेना ने इन समूहों के ठिकानों पर लगभग 30 ड्रोन से हमले करने की भी जानकारी दी थी। ये हमले उस समय हो रहे हैं जब अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल के दिनों में कई कुर्द नेताओं के संपर्क में रहे हैं। क्या हो सकती है अमेरिका की संभावित रणनीति सीएनएन के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को फैलाना और तेहरान की सत्ता संरचना को कमजोर करना है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुर्द समूह उत्तरी ईरान में सक्रिय हो जाते हैं तो वहां एक ग्राउंड बफर जोन बनाया जा सकता है, जिससे इस्राइल को भी सामरिक लाभ मिल सकता है।अमेरिका और इजरायल ने युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान-इराक सीमा के पास के इलाकों पर भारी बमबारी की है। अमेरिका स्थित थिंक टैंक सूफान सेंटर के अनुसार इन हमलों का एक उद्देश्य ईरान की सीमा रक्षा को कमजोर करना भी हो सकता है ताकि कुर्द विपक्षी समूह ईरान के अंदर प्रवेश कर सकें। हालांकि, अमेरिका ने जमीनी सैनिक भेजने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ईरान का दुर्गम भूगोल किसी भी विदेशी जमीनी अभियान को बेहद कठिन बना देगा। ब्रिटेन के थिंक टैंक चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो विन्थ्रॉप रॉजर्स के अनुसार यदि अमेरिका इन समूहों का इस्तेमाल करता है तो वह उन्हें रणनीतिक बोर्ड पर मोहरों की तरह इस्तेमाल कर रहा होगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 06, 2026, 06:51 IST
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