Jaipur: 'सड़ा सिस्टम कॉकरोच पैदा करता है', जयपुर में अभिजीत दिपके ने खोला CJP नाम के पीछे का पूरा राज

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम में शामिल होने जयपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में पार्टी के गठन, उसके नाम के पीछे की कहानी और अपने राजनीतिक विजन को विस्तार से साझा किया। दिपके ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर वर्षों से जमा आक्रोश की अभिव्यक्ति है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से शुरू हुई नाम की कहानी उन्होंने बताया कि पार्टी के नाम की शुरुआत उस समय हुई, जब सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच' शब्द चर्चा में आया। दिपके के अनुसार, उस टिप्पणी का आशय युवाओं को अपमानित और हतोत्साहित करना था। उन्होंने कहा कि वे पहले से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सक्रिय थे और उनके 20 हजार से अधिक फॉलोअर थे। इसी दौरान उन्होंने एक पोस्ट लिखी कि देश के जितने भी नाकारा, आलसी और बेकार समझे जाने वाले लोग हैं, वे मेरे साथ आएं, क्योंकि मैं कॉकरोच जनता पार्टी बनाने जा रहा हूं। एक पोस्ट और युवाओं का उमड़ा समर्थन दिपके ने कहा कि इस पोस्ट के बाद जिस तरह युवाओं का समर्थन मिला, उससे यह स्पष्ट हो गया कि देश में असंतोष और नाराजगी बहुत गहरी है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल युवाओं को नीचा दिखाने के लिए किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे प्रतिरोध और संघर्ष के प्रतीक में बदल दिया। उनका कहना था कि कॉकरोच हमेशा सड़ी-गली और गंदी जगहों से निकलता है। यदि व्यवस्था पूरी तरह सड़ चुकी हो और उसमें भ्रष्टाचार, बेरोजगारी तथा असमानता फैली हो, तो स्वाभाविक रूप से प्रतिरोध भी उसी व्यवस्था से जन्म लेगा। जनता पार्टी शब्द जोड़ने के पीछे की सोच पार्टी के नाम में 'जनता पार्टी' जोड़ने के सवाल पर दिपके ने कहा कि यह शब्द विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के नाम से प्रेरित होकर लिया गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ कॉकरोच व्यवस्था की गंदगी और सड़ांध का प्रतीक है, जबकि जनता पार्टी आम लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है। दोनों को मिलाकर कॉकरोच जनता पार्टी का नाम अस्तित्व में आया। बेरोजगारी पर सरकार और सिस्टम को घेरा दिपके ने बेरोजगारी को देश की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि युवाओं को नाकारा और आलसी कहने वाले यह बताएं कि उन्हें रोजगार क्यों नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराना सरकार और सिस्टम की जिम्मेदारी है। यदि युवा बेरोजगार हैं, तो यह उनकी नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। अमेरिका और भारत की व्यवस्थाओं की तुलना अमेरिका से हाल ही में लौटे दिपके ने वहां की व्यवस्थाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में सामाजिक सुरक्षा और अवसरों की समानता कहीं अधिक मजबूत है। सरकार नागरिकों को सुविधाएं देकर उन पर कोई एहसान नहीं जताती। वहीं भारत में अभी भी शिक्षा, रोजगार और तकनीकी विकास के मुद्दों पर गंभीर काम की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारत में केवल घोषणाएं और एमओयू दिखाई देते हैं, जबकि वास्तविक प्रगति के आंकड़े सामने नहीं आते। शिक्षा व्यवस्था पर साधा निशाना शिक्षा व्यवस्था पर हमला बोलते हुए दिपके ने कहा कि भारत में शिक्षा धीरे-धीरे व्यवसाय में बदल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों और कॉलेजों का विस्तार युवाओं के भविष्य की कीमत पर हो रहा है, जबकि सरकारी शिक्षा संस्थानों को पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं किया गया। ये भी पढ़ें:CJP Protest in Jaipur:अभिजीत दीपके जयपुर पहुंचे, NEET पेपर लीक परआज CJP का शहदी स्मारक पर प्रदर्शन युवाओं के भरोसे भविष्य की राजनीति कॉकरोच जनता पार्टी के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता युवा तय करेंगे। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बदलाव की शुरुआत हो सकता है। विचारधारा के प्रश्न पर दिपके ने कहा कि वे महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेते हैं और उनके सपनों का भारत बनाने की दिशा में काम करना चाहते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 15, 2026, 13:41 IST
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