Ram Mandir: आखिरकार चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी, चढ़ावा चोरी के लिए बैंक और अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने लंबी चुप्पी तोड़ते हुए पूरे मसले के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और ट्रस्ट के सदस्य रहे अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को भेजे गए पत्र में उन्होंने दान की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर एसबीआई की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एसआईटी को लिखे पत्र में उन्होंने अपने बयान को जांच के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि 6 फरवरी 2025 को जारी गणना प्रक्रिया के लिए बैंक और ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश से वह पूरी तरह असहमत हैं। इस दस्तावेज पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं। चंपत ने दावा किया कि उन्हें इस दिशानिर्देश पत्र की जानकारी 13 जून को ट्रस्ट के अकाउंट कार्यालय से मिली। उन्होंने कहा कि अगस्त 2020 से इस साल जून तक ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं के बीच हुए सभी महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके हस्ताक्षर हैं, ऐसे में इस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर उनसे हस्ताक्षर न कराना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि उस समय वह अयोध्या में नहीं थे तो उनके लौटने तक प्रतीक्षा की जानी चाहिए थी। पत्र में उन्होंने 9 फरवरी 2024 को ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एमओयू का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस एमओयू के प्रत्येक पृष्ठ पर उनके हस्ताक्षर हैं और उसमें गणना प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, लोहे की जाली वाला दरवाजा सहित कई प्रावधान किए गए थे। हालांकि, इस वायरल पत्र पर अभी तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसआईटी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। आराेपियों का सात दिन नहीं 40 घंटे का मिला रिमांड राम मंदिर में चढ़ावा धनराशि चोरी व गबन के मामले में जेल में निरुद्ध आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प व करुणेश की 40 घंटे के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड को मंजूरी मिल गई है। जबकि, विवेचक आशुतोष तिवारी ने 7 दिन की रिमांड की मांगी थी। रिमांड प्रार्थना पत्र पर सुनवाई से पहले विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आरोपियों से उनका पक्ष जाना। विशेष अभियोजन अधिकारी ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर 5 जुलाई को विवेचक ने जेल में जाकर लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा व करुणेश पांडेय का बयान दर्ज किया था। संवाद सराफा कारोबारियों तक पहुंची जांच जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल आरोपियों तक सीमित नहीं है। कस्टडी रिमांड के दौरान जुटाए गए इनपुट, आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल डेटा और बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण के बाद जांच का दायरा सराफा कारोबार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ चर्चित जमीन सौदों तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार कई बिंदुओं पर समानांतर जांच चल रही है। चंपत से मिले कृष्ण मोहन बंद कमरे में हुई चर्चा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने मंगलवार को राम मंदिर की व्यवस्थाओं की कमान संभालते हुए मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इसके साथ ही पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात की। दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि, बातचीत किन मुद्दोंं पर हुई यह पता नहीं चल सका है। लेकिन माना जा रहा है कि दोनों के बीच मंदिर की व्यवस्थाओं तथा मौजूदा घटनाक्रम को लेकर बातचीत हुई है। चंपत पिछले कुछ दिनों से रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम ट्रस्ट कार्यालय में रह रहे हैं। दानपात्र की व्यवस्था महासचिव देखते थे, मैं क्यों दूं इस्तीफा : गोविंद देव श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय से इस्तीफा लिया नहीं गया, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था। गिरी ने कहा कि चंपत राय निर्दोष हैं दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं महासचिव चंपत राय के अधिकार क्षेत्र में आती थीं, जबकि उनकी जिम्मेदारी केवल खातों में जमा होने वाली राशि का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है। जब उनसे पूछा गया कि क्या कोषाध्यक्ष होने के नाते वह भी इस्तीफा देंगे, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, मैं क्यों इस्तीफा दूंगा बिल्कुल नहीं दूंगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 08, 2026, 01:52 IST
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