Delhi: अल्पसंख्यक संस्थान आयोग में पद रिक्त नहीं रख सकते, हाईकोर्ट ने कहा- केंद्र सरकार की दलीलें भ्रामक

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) में अध्यक्ष और सदस्यों के पदों को खाली नहीं रखा जा सकता है, भले ही कानून में ऐसी नियुक्तियों के लिए कोई समयसीमा निर्धारित न हो। यह पद 2023 से खाली हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने केंद्र की दलीलों को भ्रामक, अस्थिर और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग अधिनियम की मंशा के विपरीत करार दिया। केंद्र ने दलील दी थी कि कानून में इसके लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं होने के कारण न्यायालय को ऐसी नियुक्तियों का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आयोग में अध्यक्ष, सदस्यों के पदों को भरने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाला आयोग केवल एक सदस्य के साथ कार्य कर रहा है। इससे संस्थानों के मौलिक अधिकारों की रक्षा प्रभावित हो रही है। पीठ ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से अध्यक्ष और सदस्यों के पदों की रिक्तियों को भरने के लिए उठाए कदमों और नियुक्तियों के लिए निर्धारित समयसीमा का विवरण देते हुए अगली सुनवाई तक हलफनामा देने को कहा। अगली सुनवाई 4 मई को होगी। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने कहा कि पदों के रिक्त होने से आयोग की कार्यवाही में कोई बाधा नहीं आई है। इस पर पीठ ने कहा, रिक्त पदों को भरने के लिए कानून में कोई समयसीमा तय न होने का बहाना बनाकर विधायी जनादेश को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता। क्या सिर्फ एक सदस्य के साथ कार्य करेंगे पीठ ने कहा, पद भरने की समयसीमा नहीं होने का मतलब यह नहीं कि लंबे समय तक कोई कदम नहीं उठाए जाएं। पीठ ने केंद्र के वकील से पूछा, क्या आप दो-ढाई साल तक सिर्फ एक सदस्य के साथ कार्य करते रहेंगे। अपने अधिकारियों को संवेदनशील बनाएं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 14, 2026, 07:51 IST
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