Hamirpur (Himachal) News: ड्रैगन फ्रूट की पौध तैयार, जल्द किसानों उपलब्ध करवाए जाएंगे पौधे
सचित्र उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी में ड्रैगन फ्रूट की आठ किस्मों पर हो रहा है अध्ययनसंवाद न्यूज एजेंसी रंगस (हमीरपुर )। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी के फल विज्ञान विभाग ने ड्रैगन फ्रूट के पौधों की नर्सरी तैयार की है। नर्सरी में दो हजार के करीब पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों को किसानों को उपलब्ध करवाया जाएगा। जुलाई और अगस्त माह में इन पौधों को रोपा जा सकता है। ऐसे में किसान संस्थान से जून माह के अंत अथवा जुलाई माह की शुरुआत में इन पौधों को खरीद सकते हैं। वर्ष 2023 में उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी के फल विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने बहु प्रचलित ड्रैगन फ्रूट पर एक अध्ययन शुरू किया था। ट्रायल के तौर पर विभाग ने त्रिपुरा, गुजरात और अन्य कई राज्यों से प्रोग्रेसिव किसानों से प्लाटिंग मटेरियल खरीद कर एक बगीचा स्थापित करने का प्रयास शुरू किया था। उसके बाद वैज्ञानिकों ने इसकी कुल आठ किस्मों को शोध में शामिल कर इसके ऊपर गहन अध्ययन करना शुरू किया था। वर्तमान समय में महाविद्यालय में त्रिपुरा रेड, श्याम रेड, थाई पिंक, रॉयल रेड, येलो व्हाइट, त्रिपुरा वाइट और रेड और व्हाइट आदि किस्म पर विस्तार से कार्य हो रहा है, ताकि भविष्य में किसानों को ड्रैगन फ्रूट की अच्छी किस्म उपलब्ध कराई जा सके। फल विज्ञान विभाग के एचओडी डॉ शशि शर्मा ने कहा कि यह फल का शुगर के मरीज के अलावा गर्भवती महिलाओं तथा सैलों के कम होने पर तेजी से नए सैल विकसित करने की प्रक्रिया में ड्रैगन फ्रूट बहुत ही उपयोगी है।ड्रैगन फ्रूट की खेती का खर्च ज्यादा, लाखों में कमाई ड्रैगन फ्रूट की खेती पर प्रति हेक्टेयर पौधे लगाने में 15 से 20 लाख रुपये का खर्च आता है। जो कि अन्य फलदार पौधों से कहीं अधिक है। लेकिन छह वर्ष के भीतर इससे 50 से 53 लाख रुपये तक की आय आसानी से ली जा सकती है। बहरहाल सरकार यदि ड्रैगन फ्रूट का बगीचा लगाने पर सब्सिडी का प्रावधान करने पर विचार करे तो इसकी व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों को बगीचा लगाने में कम खर्च वहन करना पडेगा और किसान अधिक से अधिक आय अर्जित कर सकता है।खेती के लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं नेरी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर से प्रदेश के निचले क्षेत्रों में इसके व्यावसायिक उत्पादन को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तक कि इसकी प्राकृतिक खेती करने पर भी अध्ययन चल रहा है। अधिकतर फल उत्पादन लेने के लिए प्रति पिलर मात्र छह से आठ लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यानि ज्यादा पानी की भी आवश्यकता नहीं होती है। गर्मी के मौसम में प्रति सप्ताह दो सिंचाई और अन्य मौसमों में एक सिंचाई पर्याप्त होती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 05, 2025, 17:23 IST
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