UK: मेडिकल कॉलेज में 65 प्रतिशत एसोसिएट प्रोफेसरों की कमी, सिर्फ 14 कार्यरत; मरीजों और छात्रों पर पड़ रहा असर

राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी इस वक्त फैकल्टी की कमी के बड़े संकट से जूझ रहा है। 150 वार्षिक एमबीबीएस सीटों वाले संस्थान में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के मुकाबले एसोसिएट प्रोफेसरों के 65 प्रतिशत पद खाली हैं। मानकों के अनुसार कॉलेज में 40 एसोसिएट प्रोफेसर होने चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल 14 ही कार्यरत और 26 पद खाली हैं। डॉक्टरों की कमी का असर मरीजों के इलाज से लेकर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई तक पड़ रहा है। प्रोफेसर स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। एनएमसी मानकों के अनुसार 19 प्रोफेसरों की आवश्यकता है, लेकिन यहां 12 ही कार्यरत हैं। नीचे संख्या पूरी ऊपर कुर्सियां खाली मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों का मिडिल लेयर यानी एसोसिएट प्रोफेसर के साथ ही प्रोफेसर के भी पद खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसर क्लीनिकल सेवाओं और जटिल मामलों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इनकी कमी से जटिल ऑपरेशन और केस मैनेजमेंट में दबाव बढ़ जाता है। खासकर सर्जरी, गायनी, ऑथोपेडिक्स, मेडिसिन जैसे विभागों में डॉक्टरों पर बोझ बढ़ सकता है। छात्रों की क्लीनिकल ट्रेनिंग प्रभावित होने के साथ ही पीजी छात्रों का प्रशिक्षण एवं शैक्षिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। इसके अलावा छात्रों को मरीजों की जांच, केस और उपचार का प्रशिक्षण सही ढंग से नहीं मिल पाता है। इनकी कमी से नई पीजी की सीटों विस्तार में समस्या खड़ी हो सकती है और फैकल्टी की कमी मान्यता को प्रभावित कर सकती है। पीजी सीटों पर भी पड़ सकता है असर फैकल्टी की यह कमी एमबीबीएस की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की मान्यता और नई पीजी सीटों के लिए होने वाले मूल्यांकन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एनएमसी मानको के अनुरूप आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध नहीं होने पर निरीक्षण और मान्यता प्रक्रिया में संस्थान को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में रिक्त पदों को पदोन्नति और नई नियुक्तियों के माध्यम से जल्द भरना मेडिकल कॉलेज के लिए अहम हो गया है। इन विभागों में है कमी जनरल सर्जरी में मानक के अनुसार चार एसोसिएट प्रोफेसर चाहिए, जबकि केवल एक कार्यरत है। जनरल मेडिसिन में चार के मुकाबले एक एक एसोसिएट प्रोफेसर हैं। एनेस्थीसिया में तीन पदों के मुकाबले एक भी एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत नहीं है। कम्युनिटी मेडिसिन और ऑर्थोपेडिक्स में दो-दो एसोसिएट प्रोफेसर के पद खाली हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में प्रोफेसर का एक पद खाली है। यहां तीन एसोसिएट प्रोफेसर के मुकाबले दो और चार असिस्टेंट प्रोफेसर के मुकाबले सिर्फ एक कार्यरत हैं। जनरल सर्जरी में पांच असिस्टेंट प्रोफेसरों की जरूरत के मुकाबले दो ही उपलब्ध हैं। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी है। नया प्रस्ताव तैयार कर इसे शासन को भेजा जाएगा। फैकल्टी को रोकने, फ्रे इन इंटरव्यू एक साथ करने समेत कई बिंदुओं पर मेडिकल कॉलेजों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। जल्द कमियां दूर होंगी। - डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक चिकित्सा शिक्षा

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 10, 2026, 04:34 IST
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