Aligarh News: 15 दिन पहले पसंद की थी लड़की, मां से कहा था- जल्दी लौटूंगा
घर में शादी की बातें चल रही थीं। मां बेटे की बारात निकलने के सपने देख रही थी। छुट्टी पर आए भारतीय वायुसेना के सार्जेंट जितेंद्र शर्मा ने परिवार के साथ बैठकर रिश्ते की बात की, लड़की देखने गए और पसंद भी कर ली। अगली छुट्टियों में शादी करने का वादा कर वह पांच जून को असम के जोरहाट स्थित एयरबेस पर ड्यूटी के लिए लौट गए। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह गांव की उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।शनिवार सुबह असम के जोरहाट स्थित रौरिया इंडियन एयरबेस पर लैंडिंग के दौरान वायुसेना का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत पांच जवानों की मौत हो गई। इनमें गांव सालपुर निवासी सार्जेंट जितेंद्र शर्मा भी शामिल थे।जितेंद्र के बड़े भाई रमाकांत भारद्वाज बताते हैं कि छुट्टियों के दौरान एक रिश्ता आया था। परिवार के साथ लड़की देखने गए थे। रिश्ता पसंद आने के बाद जितेंद्र ने कहा था कि अगली छुट्टियों में शादी की तारीख तय कर लेंगे। ड्यूटी पर लौटते समय उन्होंने मां से कहा था, अपना ध्यान रखना, मैं जल्दी ही वापस आऊंगा, लेकिन शनिवार को आई एक फोन कॉल ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।बहन को टीवी देखकर हुआ था अनहोनी का आभासटप्पल के गांव ताहरपुर में रहने वाली जितेंद्र की बड़ी बहन समता देवी शनिवार दोपहर घर पर टीवी देख रही थीं। तभी असम में वायुसेना के विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर चली। खबर देखते ही उनका मन घबरा गया। उन्होंने तुरंत अपने भाई रमाकांत को फोन कर कहा कि जितेंद्र से बात करके पता करो कि वह ठीक तो है। रमाकांत ने कई बार फोन मिलाया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। दोस्तों और परिचितों से भी जानकारी लेने की कोशिश की गई। इसी बीच वायुसेना के एक अधिकारी का फोन आया और उन्होंने हादसे में जितेंद्र के निधन की सूचना दी। रमाकांत कहते हैं कि फोन पर खबर सुनते ही पैरों तले जमीन खिसक गई। कुछ समझ नहीं आया कि घर जाकर मां को क्या बताऊंघर मत जाओ, बुजुर्ग मां को बेटे की मौत नहीं पता72 वर्षीय मां को अभी तक बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। परिवार और गांव के लोग इस बात का विशेष ध्यान रख रहे हैं कि अचानक उन्हें यह सदमा न लगे।परिजनों के अनुसार हर शाम जितेंद्र मां का हालचाल लेने के लिए फोन करते थे। शनिवार शाम जब उनका फोन नहीं आया तो मां ने पूछताछ भी की। परिवार ने उन्हें सिर्फ इतना बताया कि बेटे की जहाज पर ड्यूटी लगी है और वह व्यस्त है। घर के बाहर गांव वालों की भीड़ लगी है, लेकिन महिलाओं को अंदर जाने से रोका जा रहा है ताकि किसी तरह मां को घटना का पता न चल जाए। चारों बहनें अपने-अपने घरों में भाई को याद कर रो रही हैं और गांव में हर कोई पार्थिव शरीर के पहुंचने का इंतजार कर रहा है।पिता के बाद सबसे बड़ा सहारा था जितेंद्रजितेंद्र शर्मा के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा उन्हीं के कंधों पर था। गांव के लोगों के अनुसार सीमित संसाधनों वाले परिवार को संभालने और आगे बढ़ाने में जितेंद्र की सबसे बड़ी भूमिका रही। उनके दोस्त राहुल शर्मा बताते हैं कि छुट्टियों में वह सबसे ज्यादा समय मां और दोस्तों के साथ बिताते थे। मिलनसार स्वभाव के कारण पूरे गांव में उनकी अलग पहचान थी। किसी की मदद करनी हो तो वह हमेशा सबसे आगे रहते थे। अब गांव की गलियों में शादी की चर्चा नहीं, बल्कि उस बेटे की शहादत की बात हो रही है जिसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 14, 2026, 02:12 IST
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