Meerut News: एनजीटी न्यायालय में डूंगर के प्रदूषित कारखाने पर सुनवाई आज, डीएम तलब
एनजीटी में जवाब दाखिल कर कुछ समय मांगेगा प्रशासनसंवाद न्यूज एजेंसीरोहटा। डूंगर गांव में दशकों से संचालित चर्म शोधन कारखाने से फैल रहे प्रदूषण के मामले की बृहस्पतिवार को (आज) एनजीटी न्यायालय दिल्ली में सुनवाई होगी। इसमें जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए तलब किया गया है। गांव डूंगर में दशकों से एक चर्म शोधन कारखाना संचालित है। उक्त कारखाने को उच्चीकरण करने के लिए ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग द्वारा 24 वर्ष पूर्व चार करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया था। केंद्र व प्रदेश सरकार के जारी संयुक्त बजट से इस कारखाने का वर्ष 2004 में उच्चीकरण किया गया था। जिसमें प्रस्ताव तैयार करते समय कारखाने से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी गांव पूठखास से गुजर कर आजमपुर गांव को जाने वाले नाले में कर दी गई थी। अब यह पानी गांव आजमपुर के तालाब में जमा हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी से तालाब का पानी प्रदूषित होकर जहरीला हो गया है। इससे गांव में कई सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पांव पसार रही है। गांव में कई लोग कैंसर से पीड़ित हैं। इन दोनों गांवों में अभी भी लोग गंभीर बीमारियों से लोग ग्रस्त हैं। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कारखाने के उच्चीकरण के समय कार्यदायी संस्था ईटीपी प्लांट लगाकर प्रदूषित पानी की निकासी कर देती तो ग्रामीणों के सामने यह संकट खड़ा नहीं होता। वर्ष 2013 से गांव पूठखास के किसान सूरजबली सैनी आदि कारखाने से फैल रहे प्रदूषण की शिकायत जिला स्तर से लेकर प्रदेश सरकार तक कर चुके हैं। शिकायत के बावजूद प्रदूषण विभाग ने भी कई बार गांव में आकर स्थलीय निरीक्षण कर कारखाने से फैलने वाले प्रदूषण की पुष्टि करते हुए बंदी की कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन को कई बार लिखा गया। लेकिन प्रशासन के स्तर से जब कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई तो शिकायत करता ने मजबूरन एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। एनजीटी की टीम भी कई बार मौके पर आकर कारखाने से फैल रहे प्रदूषण का जायजा ले कर गई और प्रदूषण को ग्रामीणों के लिए घातक बताया। 25 नवंबर 2025 को चार सप्ताह में प्रदूषण विभाग को बंदी की कार्रवाई करने के सख्त आदेश दे दिए गए थे लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई तो प्रदूषण विभाग को तलब किया गया। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने पूरा मामला जिला प्रशासन के पाले में डालकर इतिश्री कर दी। इस मामले की एनजीटी न्यायालय में चल रही सुनवाई के लिए 5 फरवरी को जिला अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। ----------ईटीपी लगाने के लिए प्रयास शुरूप्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि तीन दिन पूर्व प्रशासन की टीम कारखाने का निरीक्षण करने गांव में गई थी। कारखाने को प्रदूषण मुक्त करने के लिए ईटीपी लगाने के लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेजने की कार्रवाई मुख्य विकास अधिकारी के स्तर पर की जा रही है। जल्द ही ईटीपी लगाकर कारखाने को प्रदूषण से मुक्त कर समस्या से निजात दिलाई जाएगी।----------बयान.कारखाने को लेकर एनजीटी में बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी। एनजीटी ने कारखाने को बंद करने के लिए कहा था मगर इस कारखाने से करीब 180 लोग जुड़े हैं। जो बेरोजगार हो जाएंगे और उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी। तीन दिन पहले कारखाने का भ्रमण कर पानी शोधन के लिए ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के लिए कहा गया है। इन्हीं बातों को लेकर एनजीटी में प्रशासन की ओर से जवाब दाखिल कर कुछ समय मांगा जाएगा। -नूपुर गोयल, सीडीओ
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 04, 2026, 20:12 IST
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