High Court : बिना ठोस सबूत निर्वाचित प्रतिनिधियों का अधिकार छीनना अनुचित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस सबूतों और बिना स्पष्ट कारणों के किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के अधिकारों को छीनना उचित नहीं है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकल पीठ ने प्रतापपुर ब्लॉक स्थित मिर्जापुर ग्राम पंचायत के प्रधान जटा शंकर तिवारी के निलंबित वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज करने वाले प्रयागराज के डीएम के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही छह हफ्ते में जवाब तलब किया है। गांव के माता शंकर तिवारी ने शिकायत कर आरोप लगाया था कि प्रधान ने 20 जून 2025 की बैठक में पांच सदस्यों के फर्जी अंगूठे के निशान लगाकर समितियों का गठन किया था। इस आधार पर डीएम ने जांच के बाद 13 जनवरी को प्रधान के सभी अधिकार सीज कर दिए थे। इसके खिलाफ ग्राम प्रधान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता प्रणेश मिश्रा ने दलील दिया कि शिकायत न सिर्फ साक्ष्यविहीन है, बल्कि दुर्भावना पूर्ण भी है। डीएम ने बिना सबूतों का विश्लेषण किए अतार्किक आदेश पारित किया है। कोर्ट ने पाया कि डीएम का आदेश तर्कहीन है। हस्ताक्षर के विवाद का निस्तारण फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकता हैं, लेकिन मौजूदा मामले में हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी का सत्यापन तक नहीं कराया गया। इसके अलावा यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने पहले भी शिकायत दर्ज कराई थी, जो गलत पाई गईं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 15, 2026, 16:58 IST
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