Artemis II: 50 साल बाद चंद्रमा मिशन की तैयारी तेज, नासा के SLS मून रॉकेट का अहम ईंधन परीक्षण रहा सफल

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने विशाल SLS मून रॉकेट का महत्वपूर्ण ईंधन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इससे आर्टेमिस II मिशन की तैयारियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इस मिशन के तहत 50 साल से अधिक समय बाद अंतरिक्ष यात्री फिर से चंद्रमा की ओर उड़ान भरेंगे। हाल ही में हुए सफल वेट ड्रेस रिहर्सल के बाद नासा को उम्मीद है कि यह ऐतिहासिक मिशन जल्द लॉन्च किया जा सकता है। इसमें तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। आर्टेमिस II क्या है आर्टेमिस II नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है। ये 1972 (अपोलो 17) के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के पास लेकर जाएगा। इस 10-दिवसीय मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्ष यान से चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे, लेकिन लैंडिंग नहीं करेंगे। यह मिशन भविष्य के आर्टेमिस III चंद्र लैंडिंग के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा परीक्षण है। ईंधन लीकेज के बाद दोबारा किया गया परीक्षण गुरुवार को नासा की टीम ने लॉन्च पैड पर खड़े स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में दूसरी बार सुपरकोल्ड ईंधन भरा। इस दौरान रॉकेट में लगभग 7 लाख गैलन (करीब 26 लाख लीटर) बेहद ठंडा ईंधन डाला गया। टीम ने तय योजना के अनुसार काउंटडाउन को अंतिम 30 सेकंड तक पहुंचाया। लेकिन अंतिम 10 मिनट की प्रक्रिया की दोबारा जांच के लिए काउंटडाउन को रोक दिया गया। यह दो दिन के अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरण था। नासा के अनुसार, इस बार हाइड्रोजन गैस का रिसाव बहुत कम रहा और पूरी तरह सुरक्षा सीमा के भीतर था। अब इंजीनियर इस परीक्षण से मिले डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। इससे यह तय होगा कि आर्टेमिसII मिशन को मार्च में लॉन्च किया जा सकता है या नहीं। पहले परीक्षण में हुआ था खतरनाक लीकेज करीब दो हफ्ते पहले हुए परीक्षण के दौरान रॉकेट और लॉन्च पैड के बीच कनेक्शन से बड़ी मात्रा में लिक्विड हाइड्रोजन का रिसाव हुआ था, जिसे खतरनाक माना गया था। इसके बाद इंजीनियरों ने सील और फिल्टर बदलकर सिस्टम में जरूरी सुधार किए। नासा के अनुसार, नए सील लगाने के बाद किए गए इस परीक्षण के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। इससे इंजीनियरों का भरोसा और भी बढ़ा है। मार्च में लॉन्च की संभावना, अंतरिक्ष यात्री क्वारंटीन की तैयारी में अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो यह मिशन 6 मार्च को लॉन्च हो सकता है। आर्टेमिसII मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के पास लगभग 10 दिन की यात्रा करेंगे। इस दौरान वे चंद्रमा की कक्षा में जाएंगे लेकिन उसकी सतह पर लैंड नहीं करेंगे। इस मिशन की खास बात यह है कि 1972 में अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार इंसान चंद्रमा की ओर उड़ान भरेंगे। मिशन की तैयारी के तहत अमेरिका और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री क्वारंटीन में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि लॉन्च विंडो के दौरान अधिक लचीलापन बना रहे। हाइड्रोजन लीकेज नासा के लिए पुरानी चुनौती नासा लंबे समय से हाइड्रोजन लीकेज की समस्या से जूझ रहा है। ये समस्या स्पेस शटल के समय से चली आ रही है। क्योंकि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के कई इंजन उसी तकनीक पर आधारित हैं। आर्टेमिसकार्यक्रम की पहली टेस्ट फ्लाइट भी हाइड्रोजन लीकेज की वजह से महीनों तक टलती रही। इसमें कोई भी अंतरिक्ष यात्री सवार नहीं था और आखिर में नवंबर 2022 में सफलतापूर्वक लॉन्च की गई। भविष्य के मिशन में और सुधार की योजना नासा के नए प्रमुख जारेड इसाकमैन ने कहा है कि भविष्य में आर्टेमिसIII मिशन से पहले रॉकेट और लॉन्च पैड के बीच ईंधन कनेक्शन सिस्टम को फिर से डिजाइन किया जाएगा। आर्टेमिसIII मिशन का मुख्य लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नासा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और तभी लॉन्च करेगा, जब सभी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और तैयार होंगे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 20, 2026, 16:13 IST
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