World Sparrow Day: चंबल के आंगन में फुदक रहीं गौरैया,  7500 पहुंची संख्या; चहचहाहट से आबाद हो रहीं वादियां

दुनियाभर में गौरैया की घटती आबादी से पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं। वहीं, चंबल के आंगन में फुदकती गौरैया मन को सुकून देती है। चहचहाहट यहां आने वाले सैलानियों को रोमांचित कर दे रही है। बाह रेंज में नौ साल पहले गौरैया की संख्या 1500 के करीब रह गई थी। लुप्त हो रही चिड़िया को बचाने के लिए वन विभाग ने रेंज में घोंसले लगाए। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग चंबल के गांवों में घरौंदा देकर ग्रामीणों को गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। गौरैया की संख्या करीब 7500 हो गई है। प्रजनन सीजन (मार्च-जून) में पेड़ों की झाड़ियों में घोंसले बनाने के साथ ही वन विभाग निगरानी शुरू कर देता है। घोंसले में गौरैया 3 से 5 अंडे देती है। 15 दिनों में चूजे निकलते हैं। करीब इतना ही समय चूजों के उड़ान भरने में लगता है। ये भी पढ़ें -यूपी न्यूज:28 पेड़ों की वजह से अटका था 500 करोड़ रुपये का ये प्रोजेक्ट, अब इस शर्त पर मिली काटने की अनुमति

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 20, 2025, 10:13 IST
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