Rohtak News: रोहतक पीजीआई में हर माह मोबाइल लत के 5 मामले आ रहे

संवाद न्यूज एजेंसीरोहतक। यूपी के साहिबाबाद में मोबाइल की लत के चलते नौवीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी करने वाली तीन बहनों की घटना सभी को झकझोरने वाली है। मोबाइल लत की यह बीमारी रोहतक में भी खूब सामने आ रही है। रोहतक पीजीआई के राज्य व्यसन एवं निर्भरता केंद्र में संचालित व्यवहार एडिक्शन क्लीनिक में मोबाइल लत के हर माह पांच मामले पहुंच रहे हैं। इनमें ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन बेटिंग, मोबाइल ओवरयूज के मरीज शामिल हैं। चिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ आर्य बताते हैं, अधिकतर अभिभावकों को पता ही नहीं चलता कि कब उनके बच्चे मोबाइल लत का शिकार हो जाते हैं। वजह, मोबाइल की लत लगने का शुरू में पता नहीं चलता। स्थिति बिगड़ने लगती है तो कुछ जागरूक लोग ही क्लीनिक में आकर समस्या बताते हैं। पीजीआई में ऐसे किया जाता है इलाज डॉ. सिद्धार्थ बताते हैं, पीजीआई में दवाओं और काउंसिलिंग दोनों तरीके से ऐसे मरीजों का इलाज किया जाता है। अभिभावकों को भी दिनचर्या में बदलाव के लिए कहा जाता है। पहले मरीज की हर तरह से जांच कर पुष्टि की जाती है कि मरीज को कोई अन्य मानसिक बीमारी तो नहीं है। इसके बाद ही दवा या काउंसिलिंग से इलाज करने का फैसला किया जाता है। डिप्रेशन, ईडीएसडी जैसी समस्या होने पर दवाइयां दी जाती हैं।कैसे पता करें बच्चे को लगी है मोबाइल लत -बच्चा मोबाइल नहीं छोड़ता है। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। -पढ़ाई पर ध्यान नहीं देता। सोने का समय तय नहीं होता।-मोबाइल छोड़ने की बात पर बच्चे गुस्सा करने लगते हैं। चिल्लाना व जिद करना शुरू कर देेते हैं। -पढ़ाई के प्रति रुझान खत्म होने लगता है। खेलकूद के बजाय मोबाइल पर अधिक समय बिताता है।-----बच्चों में धुंधला दिखने की समस्या भी बढ़ीनेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुमित सचदेवा बताते हैं, माता-पिता बच्चों को खाना खिलाने व चुप कराने के लिए मोबाइल पकड़ाने की गलती कर रहे हैं। इससे मोबाइल ओवरयूज से आंखों की मांसपेशियां भी कमजोर हो रही हैं। बच्चों में मायोपिया दूर से धुंधला दिखना की समस्या बढ़ रही है। पहले यह केवल अनुवांशिक रूप में देखने को मिलती थी। अब यह जीवनशैली और सक्रीन टाइम के कारण तेजी से फैल रही है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 05, 2026, 02:38 IST
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