सीहोर में आग का कहर: 15 एकड़ गेहूं की फसल जलकर हुई खाक, किसानों का फूटा गुस्सा; बीमा-राहत पर सरकार को घेरा

सीहोर जिले में गर्मी के साथ आगजनी की घटनाएं किसानों पर कहर बनकर टूट रही हैं। बिलकिसगंज क्षेत्र के ग्राम रामखेड़ी और नींबूखेड़ा में शुक्रवार दोपहर अचानक लगी आग ने किसानों की मेहनत को चंद मिनटों में राख कर दिया। करीब 12 से 15 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जलने से किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। घटना के बाद किसानों में भारी आक्रोश देखा गया। शुक्रवार दोपहर खेतों में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और आसपास की फसलों को अपनी चपेट में ले लिया। किसान प्रेम बाबूलाल गोरेलाल सहित कई किसानों की खड़ी फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण आग फैलती चली गई। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। चालक आरिफ खान, फायरमैन कमरुद्दीन और अतीक खान की टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर घंटों मशक्कत की। कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, जिससे आसपास के और खेतों को बचा लिया गया। आग का कारण अब तक अज्ञात फिलहाल आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि किसानों का कहना है कि कई बार बिजली के तारों में फॉल्ट या ट्रांसफार्मर से चिंगारी गिरने के कारण भी इस तरह की घटनाएं होती हैं। सीहोर जिले में यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले एक सप्ताह में निपानिया खुर्द, मोहाली, बडबेली, नोनीखेड़ी, आलमपुरा, जमुनिया फतेहपुर, धाबोटी, चार मंडली, महोडिया और इछावर क्षेत्र सहित कई गांवों में आग लग चुकी है। लगातार बढ़ रही घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रामखेड़ी गांव के किसान कुबेर सिंह मेवाड़ा (3.5 एकड़), दिलीप सिंह (3.5 एकड़), गोपाल सिंह (2 एकड़), धर्मेंद्र (1 एकड़), अरविंद मेवाड़ा (1 एकड़) और बाबूलाल (2 एकड़) सहित कई किसानों की फसल पूरी तरह जल गई। किसानों के अनुसार प्रति एकड़ करीब 70 हजार रुपए का नुकसान हुआ है, जिससे कुल नुकसान लाखों में पहुंच गया है। बीमा नहीं मिलने पर किसानों में आक्रोश किसानों का आरोप है कि फसल बीमा की राशि बैंक से स्वतः कट जाती है, लेकिन आगजनी की स्थिति में बीमा का लाभ नहीं मिलता। कृषि अधिकारी से चर्चा में भी साफ हुआ कि आग से नुकसान पर बीमा का प्रावधान नहीं है, केवल तहसील से राहत राशि मिलती है। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा सहित किसानों का कहना है कि उन्हें मात्र ₹32,000 प्रति हेक्टेयर राहत मिलती है, जो वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम है। एक हेक्टेयर में करीब डेढ़ लाख रुपए की फसल होती है, ऐसे में राहत राशि नुकसान की भरपाई नहीं कर पाती। पढे़ं:छिंदवाड़ा में पीड़ितों के बीच सीएम यादव: मृतकों के परिजनों से की मुलाकात, ढांढस बांधा; आर्थिक सहायता का एलान खेत में उतरे किसान, लगाए नारे घटना के बाद गुस्साए किसानों ने जली हुई फसल के बीच ही प्रदर्शन किया। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में किसानों ने नारेबाजी कर केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि आगजनी को भी फसल बीमा के दायरे में शामिल किया जाए। किसानों ने आरोप लगाया कि कई बार झूलते तार और ट्रांसफार्मर की खराबी से आग लगती है, लेकिन ऐसे मामलों में भी उचित मुआवजा नहीं मिलता। उन्होंने मांग की कि बिजली विभाग की लापरवाही से आग लगने पर भी आरबीसी 6(4) के तहत उचित राहत दी जाए।किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि फसल बीमा योजना में आगजनी को भी शामिल किया जाए। किसानों का कहना है कि अगर बीमा का लाभ नहीं मिलना है तो प्रीमियम भी नहीं काटा जाना चाहिए। सीहोर जिले में लगातार बढ़ रही आगजनी की घटनाओं ने किसानों को डरा दिया है। हर दिन नई घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पल भर में बर्बाद हो रही है। अब किसान प्रशासन से ठोस समाधान और उचित मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 27, 2026, 18:02 IST
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