सिंहस्थ 2028: तैयारियों के बीच ओंकारेश्वर में अतिक्रमण हटाने पर मंथन, आम सहमति से होगा फैसला; उठीं ये चिंताएं
आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत ओंकारेश्वर में विकास कार्यों और संभावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, धार्मिक संगठनों और नागरिकों के साथ संवाद शुरू कर दिया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इसके लिए आम सहमति और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी क्रम में खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक आगम जैन ने ओंकारेश्वर थाना परिसर में बैठक आयोजित की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सिंहस्थ की तैयारियों के तहत होने वाले विकास कार्यों और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। बैठक से दो दिन पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष मनीषा परिहार, नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष राठौर, नगर परिषद के पार्षदों, खंडवा संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल तथा मांधाता विधायक नारायण पटेल ने खंडवा में बैठक कर संभावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर अपनी चिंताएं प्रशासन के समक्ष रखी थीं। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने सुझाव दिया कि नगर के 15 वार्डों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए 15 सदस्यीय समिति गठित की जाए, जो स्थानीय समस्याओं, जनभावनाओं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करे। समिति गठन की जिम्मेदारी नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों को सौंपने का सुझाव भी दिया गया। हालांकि इस पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विकास कार्य जरूरी कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा के दर्शन और ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में यातायात, सुरक्षा, आवागमन और दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सड़क चौड़ीकरण, आधारभूत संरचना विकास तथा कुछ स्थानों पर अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी भी निर्णय से पहले पंडा-पुजारी समाज, नाविक संघ, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर आम सहमति बनाने का प्रयास करेगा। बड़ी कार्रवाई की आशंका से बढ़ी चिंता सूत्रों के अनुसार सिंहस्थ-2028 को देखते हुए नगर में व्यापक विकास योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण, मंदिर परिसर के आसपास सुविधाओं का विस्तार तथा श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए कई क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। हालांकि संभावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थानीय व्यापारियों, होटल संचालकों और रहवासियों में चिंता दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर मकान, दुकान, होटल और लॉज प्रभावित होते हैं तो पुनर्वास और रोजगार को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। पीढ़ियों से बसे लोगों के भविष्य पर भी हो विचार नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि अनेक परिवार पीढ़ियों से ओंकारेश्वर में निवास कर रहे हैं और उनकी आजीविका भी यहीं से जुड़ी है। यदि किसी कारणवश उन्हें हटाया जाता है तो पुनर्वास, रोजगार और जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केवल उन्हीं स्थानों पर कार्रवाई हो जहां सार्वजनिक हित में इसकी वास्तविक आवश्यकता हो। ममलेश्वर क्षेत्र में विस्तार योजनाओं की चर्चा स्थानीय सूत्रों के अनुसार ममलेश्वर क्षेत्र के विकास और मंदिर परिसर के विस्तार को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर योजनाएं तैयार की जा रही हैं। भविष्य की परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए आसपास के क्षेत्रों में भूमि और निर्माण संबंधी स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पूर्व अनुभवों का हवाला देकर उठे सवाल ओंकारेश्वर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं पंडा संघ के अध्यक्ष पंडित नवल किशोर शर्मा ने कहा कि वर्ष 2018 में पुराने बस स्टैंड क्षेत्र की 19 दुकानों को हटाया गया था, लेकिन आज तक वहां प्रभावित व्यापारियों को नई दुकानें उपलब्ध नहीं कराई गईं। उनका कहना है कि कई परिवार बेरोजगार हो गए और जिस उद्देश्य से तोड़फोड़ की गई थी, वह भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नगर में कई ऐसे स्थान हैं जहां भवन तोड़े जाने के बाद भूमि वर्षों से खाली पड़ी है। इसलिए किसी भी कार्रवाई से पहले दीर्घकालिक योजना और उसके क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा सार्वजनिक की जानी चाहिए। अतिक्रमण हटाने में समानता का सिद्धांत अपनाने की मांग पूर्व सैनिक एवं समाजसेवी प्रदीप ठाकुर ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में भेदभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि प्रशासन कार्रवाई करता है तो वह सभी के लिए समान होनी चाहिए। छोटे व्यापारियों और गरीब परिवारों के साथ-साथ बड़े और प्रभावशाली अतिक्रमणों पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए, तभी जनता का विश्वास कायम रहेगा। विकास और आजीविका के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के साथ ओंकारेश्वर में विकास कार्यों की गति तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर प्रशासन करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिक अपने आवास, व्यवसाय और रोजगार को लेकर चिंतित हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और प्रस्तावित समिति के बीच होने वाली चर्चाएं यह तय करेंगी कि विकास, धार्मिक आस्था और स्थानीय हितों के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 06, 2026, 12:22 IST
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