UP: मजहबी शिक्षा की आड़ में नेपाल सीमा पर मिशन 'आबाद', हुई विदेशी फंडिंग; बढ़ी बांग्लादेशी-रोहिंग्या की आबादी

मजहबी शिक्षा की आड़ में भारत से सटे नेपाली क्षेत्र में तुर्की, सीरिया, पाकिस्तान और कतर के सहयोग से मिशन आबाद रंग दिखाने लगा है। इन देशों से करीब 650 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई है। सुरक्षा एजेंसियां इसे सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव के प्रयास के रूप में देख रही हैं। मतलब साफ है यहां मुस्लिम आबादी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बीते पांच वर्ष में 31 प्रतिशत आबादी बढ़ी है। इनमें अधिकतर बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं। इनकी कोशिश भारत में बसकर संतुलन बिगाड़ने की है। उत्तर प्रदेश के महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में जकात के नाम पर विदेशी फंडिंग की बात सामने आई है। इस धनराशि का प्रयोग धर्म प्रचार और धर्मांतरण में किया जा रहा है। सीमा पर बने धार्मिक स्थलों के लिए सऊदी अरब से भी पैसा मिल रहा है। नेपाल के दांग जिले के मुस्तकीम बताते हैं कि यहां जिस मस्जिद में एक मीनार है, उसके लिए पैसा सऊदी अरब से आया है। मिशन आबाद भारत-नेपाल के बीच तराई व मधेश क्षेत्र में समुदाय विशेष की आबादी बढ़ाने की कोशिश। शिक्षण संस्थानों की आड़ में असम व पश्चिम बंगाल तक के लोगों को बसाने की कोशिश मिशन आबाद का हिस्सा है। कहां से आया कितना फंड गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार कतर, तुर्की, पाक से 500 करोड़ की नेपाल में मौजूद इस्लामिक संगठनों को मिले। सीमा पर मस्जिद और मदरसे के लिए अक्तूबर 2023 में तुर्की और कतर से 350 करोड़ रुपये मिले। अक्तूबर 2022 में 25 करोड़ रुपये की फंडिंग पाकिस्तान से। इन्हें मान रहे संदिग्ध सऊदी अरब इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक मुस्लिम वर्ल्ड लीग दावत-ए- इस्लाम इस्लामिक संघ ऑफ नेपाल। यह भी पढ़ें:UP: गंगा समेत यूपी की 11 नदियों में होगा जल परिवहन, 761 किमी का रूट तैयार; योगी सरकार ने बनाया ये प्लान

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 29, 2025, 04:33 IST
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