आयकर रिटर्न न दाखिल करने पर अधिकतम सजा दो साल
सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित बजट गोष्ठी में वक्ताओं ने प्रस्तावित वित्त विधेयक 2026 के प्रावधानों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइल न करने पर जेल की सजा को सात साल से घटाकर दो साल और जुर्माने का विकल्प दिया गया। इससे करदाताओं में भय कम होगा और आयकर विभाग में पारदर्शिता बढ़ेगी। मुख्य वक्ता सीए गोविंद माहेश्वरी ने बताया कि यह विधेयक एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर अधिनियम 2025 की नींव रखेगा। यह 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है लेकिन संशोधित रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है। विदेशी शिक्षा, चिकित्सा और टूर पैकेज पर स्रोत पर कर कटौती (टीसीएस) की दर को घटाकर दो फीसदी कर दिया गया है। सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) पर मैच्योरिटी पर अब पूंजीगत लाभ कर लगेगा। बायबैक टैक्स को डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में कर योग्य माना जाएगा। न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) की दर 15 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी की गई है। टीडीएस और टीसीएस प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाया गया है तथा छोटी त्रुटियों पर अब भारी जुर्माने के बजाय फीस आधारित व्यवस्था लागू होगी। जीएसटी के तहत पोस्ट-सप्लाई डिस्काउंट को सरल किया गया है जिससे सप्लायर क्रेडिट नोट जारी कर डिस्काउंट समायोजित कर सकेगा। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में 90 फीसदी तक प्रोविजनल रिफंड मिलेगा, जिससे निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। इस मौके पर सुनील त्रिवेदी, एसपी सिंह, अवनीश मिश्रा, विमल कटियार, बीके शुक्ला, अरविंद शुक्ला, दिनेश शुक्ला, विनय अवस्थी, शैलेंद्र बाजपेई, सुनील पाल, मोहित निगम, पवन गुप्ता, एसपी चतुर्वेदी, पीएम चौधरी, रवि पासान, देवेंद्र पांडे, हरि राम अग्रवाल, संतोष श्रीवास्तव मौजूद रहे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 09, 2026, 18:39 IST
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