श्रावस्ती में श्रीलंका व कंबोडिया के अनुयायियों से बौद्ध तपोस्थली हुई गुलजार

श्रावस्ती के कटरा स्थित बौद्ध तपोस्थली में शनिवार को श्रीलंका व कंबोडिया से आए अनुयायियों के 120 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से गंधकुटी और राप्ती नदी के तट पर स्थित वगहा में पुष्प पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया। बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु दीपालोक ने कहा कि अविद्या के समाप्त होने पर संस्कारों, विज्ञान, नाम रूप, छह आयतनों, स्पर्श, वेदना, तृष्णा, उपादान और भव का निरोध होता है। जिससे अंतत जन्म, जरा, शोक, दुख और पश्चाताप का अंत हो जाता है। भगवान बुद्ध ने हमेशा अहिंसा, ज्ञान व ध्यान का संदेश दिया। बुद्ध ने भी बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान साधना की और ज्ञान की प्राप्ति की। विद्या हमारे सभी प्रकार के दुखों का नाश करती है। अनुयायियों ने आनंद बोधि वृक्ष, सभा मंडप, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, राहुल कुटी, संघमित्रा कुटी, संघारम बुद्ध विहार, कच्ची कुटी-पक्की कुटी आदि का भ्रमण कर इनके इतिहास की जानकारी ली। साथ ही इन स्थलों के साथ जुड़े भगवान बुद्ध के जीवन की जानकारी ली।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 14, 2026, 16:00 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »


श्रावस्ती में श्रीलंका व कंबोडिया के अनुयायियों से बौद्ध तपोस्थली हुई गुलजार #SubahSamachar