दावा : स्वाद बदलने के लिए छात्राओं ने चूल्हे पर पकाई रोटी
बरेली। लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की किल्लत के बीच चूल्हे पर खाना पकाने के मामले का संज्ञान लेकर अफसर राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास पहुंचे। रिपोर्ट में सिलिंडर उपलब्ध कराने के दावे के साथ सफाई दी है कि छात्राओं ने स्वाद बदलने के लिए चूल्हे पर रोटी पकाई थी।समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित इस छात्रावास में 37 छात्राएं रहती हैं। छात्रावास में 14 किलो के घरेलू सिलिंडर प्रतिबंधित हैं। छोटे यानी पांच किलो के सिलिंडर में गैस रिफिल कॉमर्शियल से भी महंगी है। इसलिए छात्राएं चूल्हे पर रोटी पकाने के लिए विवश हैं। गैस की किल्लत से कई छात्राओं के घर जाने की जानकारी पर अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो अफसर निरीक्षण करने पहुंचे। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शखर ने रिपोर्ट में कहा है कि छात्राओं को एलपीजी मिल रही है। स्वाद बदलने के लिए छात्राओं ने चूल्हे पर रोटी पकाई थी।छात्राओं को पांच किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलिंडर के बारे में बताया। हालांकि, छात्राओं की मुख्य समस्या घरेलू सिलिंडर की तरह कम कीमत पर रिफिल, सुलभ उपलब्धता का रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं के सामने फिर चुनौती बरकरार है।घरेलू सिलिंडर और एफटीएल रिफिल की कीमतघरेलू एलपीजी सिलिंडर 14.2 किलो के होते हैं। रिफिल 931 रुपये (66.5 रुपये प्रति किलो) है। जबकि, एफटीएल कॉमर्शियल स्तर के पांच किलो के सिलिंडर होते हैं। इनके रिफिल का वर्तमान मूल्य 565 रुपये (113 रुपये प्रति किलो) है। वहीं, एफटीएल सिलिंडरों की वापसी नहीं होती, इसलिए धरोहर राशि नहीं मिलती। छोटे सिलिंडर खत्म होने पर रिफिल के लिए बार-बार आवाजाही भी परेशानी की वजह है।वर्जनजिला पूर्ति अधिकारी के साथ छात्रावास का जायजा लिया गया। छात्राओं को आश्वस्त किया है कि वह नजदीकी गैस एजेंसी से पांच किलो वाले सिलेंडर ले सकती हैं। इसको वह गैस एजेंसी पर ही भरवा सकती हैं। - सुधांशु शेखर पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 09, 2026, 03:21 IST
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