Chandigarh-Haryana News: बर्खास्त दिव्यांग कर्मी को 28 साल बाद इंसाफ, मिलेंगे वेतन, पदोन्नति सहित सभी लाभ
-70 प्रतिशत दिव्यांग होने के चलते याची को कर दिया गया था बर्खास्त-देरी से अदालत का दरवाजा खटखटाने की सरकारी की दलील खारिजअमर उजाला ब्यूरोचंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1997 में बिजली बोर्ड के कर्मचारी को ड्यूटी पर हुए एक एक्सीडेंट में 70 फीसदी दिव्यांग होने के बाद नौकरी से निकालने को गैर कानूनी करार देते हुए उसकी पूरी सर्विस 1974 से 2015 तक बिना किसी ब्रेक के लगातार मानने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 1997 से 2015 तक का वेतन, पदोन्नति व अन्य लाभ जारी करने का हरियाणा सरकार को आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के चलते दिव्यांग कर्मी को अब 28 साल बाद जाकर इंसाफ मिला है।याचिकाकर्ता 1974 में हरियाणा बिजली बोर्ड में वर्क-चार्ज टी-मेट के तौर पर शामिल हुआ था और 1982 में रेगुलर हो गया था। 1997 में गंभीर इलेक्ट्रिक शॉक लगने से वह 70 प्रतिशत दिव्यांग हो गया और उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद याची ने चुनौती दी थी और सेवानिवृत्ति तक की अवधि के लिए वेतन व अन्य लाभ जारी करने की अपील की थी। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची ने बिना किसी आपत्ति दो दशकों से ज़्यादा समय तक बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती नहीं दी और चपरासी के तौर पर नई नियुक्ति स्वीकार कर ली थी। देरी और लापरवाही की वजह से उसका यह दावा कानूनन नहीं बनता है। इसके अलावा नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को पेंशन का हक नहीं है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि कर्मचारी दीप चंद ने अपनी सर्विस खत्म होने के बाद मजबूरी में चपरासी की नौकरी स्वीकार कर ली थी क्योंकि वह एक भयानक एक्सीडेंट के बाद गरीबी का सामना कर रहा था। कोर्ट ने कहा कि अगर कर्मचारी किसी विकलांगता की वजह से मौजूदा पद के लिए सही नहीं रहता, तो नियोक्ता को उसे उसी पे स्केल और सर्विस बेनिफिट्स वाली दूसरी पोस्ट पर शिफ्ट करना चाहिए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 29, 2025, 20:58 IST
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