High Court : आश्रितों में उपजे विवाद तो बिना जांच नौकरी देना दूसरे के साथ अन्याय
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद आश्रितों में विवाद पैदा हो तो अनुकम्पा नियुक्ति देने में सावधानी बरतना जरूरी है। बिना गहन जांच के किसी एक को नौकरी देना दूसरे के साथ अन्याय भी हो सकता है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने शाहजहांपुर के निवासी अभिनय सक्सेना (नाबालिग पुत्र) की ओर से सौतेली मां के खिलाफ दाखिल याचिका निस्तारित कर दी। कोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को मृतक शिक्षक के नाबालिग बेटे और उसकी सौतेली मां के दावों पर तीन महीने के भीतर सुनवाई कर फैसला लेने का आदेश दिया है। मामले के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षक विवेक कुमार सक्सेना की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। संदेह पैदा होने पर याची की सौतेली मां सोनाली सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उधर, पति की मौत के बाद सोनाली ने अनुकम्पा नियुक्ति का दावा किया तो नाबालिग बेटे की ओर से विभाग में आपत्ति दर्ज कराई गई। बेटे का कहना है कि पिता की मौत के बाद सौतेली मां उसकी देखभाल नहीं कर रही है। साथ ही यह आरोप भी लगाया कि मां ने पिता की मृत्यु के बाद मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ और पेंशन पहले ही प्राप्त कर लिए हैं। चूंकि, पिता की मौत संदिग्ध थी और मां के खिलाफ एफआईआर दर्ज है, इसलिए उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। मां-बेटे में उपजे विवाद में विभाग भी उलझ गया। हालांकि, बीएसए की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विवाद के कारण नियुक्ति अभी तक रुकी हुई है और विभाग ने इस पर कानूनी राय मांगी है। इस दौरान सौतेली मां की नियुक्ति पर लगी रोक बरकरार रहेगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 22, 2026, 11:09 IST
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