High Court : हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता किशोरी को दी गर्भपात की अनुमति, बागपत और मेरठ के सीएमओ को निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता के गर्भपात कराने की मांग में दाखिल आवेदन पर शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि, इसमें देरी से पीड़िता के जीवन को खतरा हो सकता है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने आवेदन को रद्द कर असंवेदनशीलता दिखाई है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दे दी। बागपत के थाना सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र निवासी 17 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की मां ने गर्भ को समाप्त करने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने 22 अगस्त को आदेश पारित कर बागपत के सीएमओ को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। बोर्ड ने 23 अगस्त को पीड़िता की जांचकर रिपोर्ट में कहा कि भ्रूण की आयु 21 सप्ताह है। ऐसे में अगर गर्भ जारी रहता है तो यह पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। इस पर पीड़िता और उसके माता-पिता ने गर्भपात के लिए सहमति दी है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की सहमति के आधार पर गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। साथ ही बागपत व मेरठ के सीएमओ निर्देश दिया है कि वे लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की टीम गठित कर तीन दिन में गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करें। वहीं, मेरठ के डीएम को निर्देश दिया गया है कि वे पीड़िता, उसके परिवार के चिकित्सा और अन्य खर्चों का वहन करें। मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी। मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश कोर्ट ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। ताकि, इस तरह के मामलों में देरी से बचने के लिए दिशानिर्देश बनाए जा सकें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 27, 2025, 19:53 IST
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