क्या खामेनेई की मंशा पर ट्रंप फेर रहे पानी?: बातचीत की राह पर ईरान, लेकिन अमेरिकी हमले से बिगड़ जाएंगे हालात!
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में पश्चिम एशिया के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। एक और जहां ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर साफ संकेत दिया है। वहीं दूसरी ओरउसी समय अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जो विमानवाहक पोत की ओर बढ़ रहा था। यह विरोधाभास दिखाता है कि एक तरफ वार्ता की कोशिशें हैं, वहीं दूसरी ओर तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सवालसवाल यह है कि क्या ईरान और अमेरिका डिप्लोमेसी के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे, या सैन्य टकराव को कोई रोक नहीं पाएगा। बता दें कि ईरान के राष्ट्रपति ने मंगलवार को कहा कि विदेश मंत्री को अमेरिका के साथ तर्कसंगत और न्यायसंगत बातचीत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यह तेहरान की ओर से अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि वह वाशिंगटन के साथ वार्ता के प्रयास करना चाहता है। इस घोषणा ने सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के लिए एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जिन्होंने हफ्तों से ईरानियों को चेतावनी दी थी कि उनके देश में अशांति उनके नियंत्रण से बाहर हो गई है। बातचीत को खामनेई का समर्थन इससे यह भी संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का उन वार्ताओं के लिए समर्थन मिल गया है, जिन्हें 86 वर्षीय धर्मगुरु ने पहले खारिज कर दिया था। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पिछले महीने देशभर में हुए प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई के बाद अमेरिका के साथ तनाव काफी बढ़ गया है। पेजेशकियान ने एक्स पर अंग्रेजी और फारसी में लिखा कि यह फैसला क्षेत्र के मित्र देशों की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति के वार्ता प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के अनुरोध पर लिया गया है। अमेरिका ने अभी यह स्वीकार नहीं किया है कि इस तरह की कोई बातचीत होने जा रही है। उधर यूएई ने कहा, पश्चिम एशिया को युद्ध की जरूरत नहीं है। ये भी पढ़ें:-अमेरिका से डील की कीमत: रूस से तेल की खरीद कम करेगा भारत, क्या बदल रही देश की ऊर्जा नीति; समझिए इसके मायने धमकियों से मुक्त वातावरण हो ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा, मैंने अपने विदेश मंत्री को निर्देश दिया है कि यदि उपयुक्त माहौल यानी धमकियों और अनुचित अपेक्षाओं से मुक्त वातावरण हो, तो वह गरिमा, विवेक और दूरदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप तर्कसंगत और न्यायसंगत बातचीत को आगे बढ़ाएं। पेजेशकियान ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची को दिए आदेश में सावधानी बरतने की हिदायत भी दी। पर्दे के पीछे तुर्किये कर रहा था काम अमेरिकी पश्चिम एशियाई दूत स्टीव विटकॉफ के क्षेत्रीय दौरे के दौरान तुर्किये इस सप्ताह के अंत में वहां वार्ता के लिए पर्दे के पीछे से काम कर रहा था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान-अमेरिका किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे या नहीं, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता प्रक्रिया में ईरान के एटमी कार्यक्रम को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल कर रखा है। ट्रंप ने जून में इस्राइल के 12 दिनी युद्ध में ईरान के तीन एटमी ठिकानों पर बमबारी के आदेश दिए थे। ये भी पढ़ें:-यूरोप के बाद अमेरिका से करार: रोजगार समेत इन क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा, कितनी बदलेगी भारत की आर्थिक तस्वीर गौरतलब है कि सोमवार देर रात, ईरान समर्थित लेबनानी आतंकी गुट हिजबुल्ला के राजनीतिक सहयोगी पैन-अरब उपग्रह चैनल अल मायादीन ने खामनेई के शीर्ष सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी का साक्षात्कार प्रसारित किया। शमखानी अब देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि वार्ता होती है, तो शुरुआत में यह अप्रत्यक्ष होगी, और यदि कोई समझौता संभव प्रतीत होता है तो प्रत्यक्ष वार्ता की ओर बढ़ा जाएगा। वार्ता पूरी तरह से परमाणु मुद्दों पर केंद्रित होगी। अन्य वीडियो
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 04, 2026, 04:56 IST
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