पहलगाम हमले का एक साल: इंसानियत पर आतंकियों के वार की टीस नहीं हो रही कम, परिजनों ने यादों के सहारे जीना सीखा
22 अप्रैल 2025स्थान पहलगाम की बायसरन घाटीहंसते-खिलखिलाते चेहरों से भरा मैदान अचानक चीखों में बदल गया। चार दिन पहले दुल्हन बनी एक बेटी, गोद में पति का सिर लिए पत्थर सी बैठी थीचारों तरफ 26 लाशें और सन्नाटाआज भी यह मंजर रूह कंपा देती है। आहिस्ता-आहिस्ता एक साल बीत गया, पर जख्मों से आज भी टीसें उठती हैं। दर्द कुछ कम हो इसलिए किसी ने सेवा को दर्द की दवा बना लिया, किसी ने यादों को जीने का सहारा बना लिया। यह हौसले की कहानी है। टूटकर भी जीने की कहानी हैरोली खन्ना की रिपोर्ट मेरे बेटे शुभम को घूमने का बहुत शौक था बायसरन गया तो लौटा नहीं। आतंकियों ने पहली गोली बेटे के माथे पर मारी थी वह हमारे सपनों में रंग भर रहा था, पर गद्दारों ने उसे छीन लिया, हमारा सबकुछ चला गया, उम्मीदें चली गईं, पर संकल्प लिया कि गद्दारों के सामने हौसला नहीं टूटने देंगे। कानपुर के संजय द्विवेदी और सीमा द्विवेदी बेटे शुभम को याद करते-करते भावुक हो जाते हैं, फिर दृढ़ता दिखाते हुए कहते हैं, हमने ठाना है कि हम शुभम ही नहीं, बल्कि पहलगाम के सभी शहीदों की स्मृतियों को सहेज कर रखेंगे। संजय कहते हैं, जिंदगी के इस दर्द में, उतार-चढ़ाव में हमारी बहू ऐशन्या हर वक्त हमारे साथ रही, जैसे शुभम रहता था, वह हर कदम बेटे का फर्ज निभाती रही, आतंकियों ने जब शुभम को गोली मारी थी, तब ऐशन्या भी वहीं थी जो कुछ उसने सहा, उसने पूरे देश को झकझोर दिया, उसने खुद को संभाला, हमारे हौसले को डगमाने नहीं दिया वह बहू नहीं, हमारी बेटी है। हर हालात में साथ खड़ी रहती है। हमारे चेहरे पर उदासी नहीं आने देती। मगर यह भी सच है जब तक सांसें हैं, ताउम्र टीस मिटेगी नहीं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 21, 2026, 04:07 IST
पहलगाम हमले का एक साल: इंसानियत पर आतंकियों के वार की टीस नहीं हो रही कम, परिजनों ने यादों के सहारे जीना सीखा #CityStates #Jammu #JammuAndKashmir #PahalgamAttack #JammuNews #PahalgamAttackDate #SubahSamachar
