UP: स्वदेशी भाषाओं को शिक्षा-रोजगार से जोड़कर और द्विभाषी किताबों से बचेगी जनजातियों की संस्कृति
Varanasi News: राजघाट स्थित वसंत महिला महाविद्यालय में स्वदेशी भाषाओं को शिक्षा-रोजगार से जोड़कर और द्विभाषी किताबों से जनजाति संस्कृति को बचाने की कवायद हुई। शुक्रवार को संथाली, मुंडारी और हो भाषाओं के विकास और संरक्षण के लिए डिजिटल और सांस्कृतिक नवाचार पर 100 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। यूपी के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान और कर्नाटक के प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. मनोहर कुमार दास ने बताया कि महिलाओं की मोबाइल और डिजिटल संसाधनों तक सीमित पहुंच भाषा संरक्षण के प्रयासों को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों ने स्वदेशी भाषाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने, द्विभाषी किताबों और जनजातीय भाषाओं को शिक्षण माध्यम में रखने की वकालत की। मुख्य अतिथि ओडिशा स्थित राजेंद्र विवि के कुलपति प्रो. विभूति भूषण मलिक ने कहा कि जनजातीय भाषाएं केवल बातचीत का माध्यम नहीं बल्कि समुदाय की पहचान, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अस्तित्व की आधारशिला हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 17, 2026, 22:10 IST
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